ज्वालामुखी (कांगड़ा)। सरकारी अस्पताल में सरकारी कर्मचारी अपनी ड्यूटी निभाने के लिए कितने सजग हैं, इस बात की तस्दीक उस वक्त हुई जब सुबह करीब नौ बजे सड़क दुर्घटना में घायल भाई बहन स्कूल की बजाए अस्पताल में गंभीर हालत में उपचार को पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद जब घायल अवस्था में पड़े निर्धन परिवार के इन बच्चों को अस्पताल की सरकारी एंबुलेंस की जरूरत पड़ी तो मौके पर यह सुविधा नहीं मिल पाई। बेबसी में दोनों बच्चों को अलग-अलग वाहनों में 9 बजकर 20 मिनट पर भेजा गया। इससे शहर के बाशिंदों में काफी रोष देखा गया। हालांकि सूत्र बताते हैं कि अस्पताल इस एंबुलेंस का प्रयोग केवल कार्यालय व किसी वीवीआईपी के आने पर ही करता है। सूत्रों के मुताबिक इस हादसे के दौरान मौके पर ड्राइवर भी मौजूद नहीं था। अगर अस्पताल की एंबुलेंस उपलब्ध हो जाती तो भाई बहन को एक ही गाड़ी में भेजा जा सकता था। उधर, बीएमओ बृज मोहन शर्मा का कहना है कि एंबुलेंस के उपलब्ध न होने के कारणों का पता लगाया जाएगा।
उपलब्ध कराई थी एंबुलेंस: सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. केएस डोगरा का कहना है कि ज्वालामुखी अस्पताल में सेवा भारती संस्था की एक एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध है। मौके पर बच्चों को उक्त एंबुलेंस मुहैया कराई गई थी, जिसके प्रति किलोमीटर के हिसाब से बहुत कम दरें निर्धारित हैं। लेकिन परिजनों ने सुविधा क्याें नहीं ली, इसका पता लगाया जाएगा।