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आखरि ज्वालाजी मंदिर न्यास कब देगा श्रद्धालुओं को धर्मार्थ औषधालयकी सुविधा

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चौबीस वर्ष से चल रहा धर्मार्थ औषधालय बंद
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ज्वालाजी मंदिर न्यास ने शुरू हुआ केंद्र
डॉक्टर की सेवानिवृत्ति के बाद लगा ताला
कपिल शर्मा
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर न्यास की 24 वर्ष से धर्मार्थ औषधालय की सुविधा 2015 में डॉ. विनोद शुक्ला की सेवानिवृत्ति के बाद से बंद हो गई है। इसके बाद श्रद्धालु मंदिर न्यास के नि:शुल्क धर्मार्थ औषधालय की सुविधा से वंचित हैं। उन्हें दवाई की सुविधा नहीं मिल रही है और न ही प्राथमिक चेकअप की। हैरत की बात है कि मंदिर में बैठे अधिकारी अपनी सुख-सुविधाओं का एसी कमरों में बैठ कर पूर्ण आनंद ले रहे हैं, लेकिन उन्होंने दोबारा इस धर्मार्थ औषधालय को चलाने के लिए अभी तक कोई भी स्थायी प्रयास नहीं किया है। शहरवासियों में भी मंदिर अधिकारियों की इस सुस्त कार्यप्रणाली के प्रति रोष है। उनका कहना है कि मंदिर न्यास धर्मार्थ औषधालय की सुविधा को तुरंत शुरू करे। शहरवासियों ओंकार चंद सूद सीनियर सिटीजन का इस संदर्भ में कहना है कि मंदिर न्यास वर्षों से धर्मार्थ औषधालय की सुविधा देता रहा है। ऐसे में औषधालय बंद रहना न्याय संगत नहीं है। स्थानीय लोगों और यात्रियों को इसका फायदा जल्द मिलना चाहिए।
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वहीं स्थानीय निवासी रमेश शर्मा का कहना है कि मंदिर न्यास को करोड़ों की आय हर वर्ष होती है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए शुरू किए गए धर्मार्थ औषधालय की सुविधा को बंद रखना मंदिर के प्रति आस्था को ठेस पहुंचाता है। जल्द इसे शुरू किया जाना चाहिए। नवरत्न का कहना है कि मंदिर न्यास श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए निशुल्क धर्मार्थ औषधालय में दवाई लेने के लिए रोजाना श्रद्धालु जाते हैं, लेकिन वहां पर ताला लटका हुआ देखकर उनके मन को ठेस पहुंचती है। इसे जल्द शुरू किया जाए। कालीदास का कहना है कि मंदिर न्यास पूर्व में धर्मार्थ औषधालय की निशुल्क सेवा को जल्द से जल्द शुरू करे। बिजतेंद्र धीमान जिला परिषद सदस्य का कहना है कि मां ज्वालाजी शक्तिपीठ आस्था का प्रतीक है। धर्मार्थ औषधालय बंद होना चिंताजनक है। चरणदास सूद समाजसेवी का कहना है कि धर्मार्थ औषधालय बंद होना मंदिर प्रशासन की नालायकी है। पूर्व सेवानिवृत्त डॉक्टर की स्वेच्छा से सेवाएं ली जा सकती हैं। इसके लिए मंदिर अधिकारियों को प्रयास करना चाहिए।
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