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अवैध खनन सोख रहा जल योजनाओं का पानी

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रितेश महाजन
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नूरपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश और पंजाब की सीमा पर स्थित चक्की दरिया से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में खनन माफिया की ओर से किए जा बेतरतीब अवैध खनन का खामियाजा आईपीएच विभाग को अपनी जल योजनाओं में पानी का स्तर गिरने के रूप में भुगतना पड़ रहा है। इस अवैज्ञानिक खनन से नूरपुर उपमंडल की चक्की और छौंछ खड्ड सहित पंजाब से सटे नक्की, खन्नी, छन्नी, कंडवाल, माजरा, ढांगूपीर और मैरा समेत कई अन्य क्षेत्रों में कई एकड़ कृषि योग्य भूमि खनन की भेंट चढ़ चुकी है, वहीं इन सीमांत इलाकों में बेतहाशा मैटीरियल की निकासी से खड्डों के बहाव का रुख भी बदल गया है। जेसीबी मशीनों, ट्रकों और ट्रैक्टरों के जरिये जा रहे अंधाधुंध अवैज्ञानिक खनन से छौंछ और चक्की दरिया के किनारे बनी पेयजल और सिंचाई योजनाओं के अस्तित्व पर खतरा हो गया है। अवैध खनन की मार झेल रही जल योजनाओं का जलस्तर गिरने से पेयजल संकट खड़ा हो सकता है। खनन माफिया लंबे अरसे से चक्की बैलट के सीमावर्ती गांवों नक्की, छन्नी, माजरा, कंडवाल, खन्नी, पैल, कंडवाल, ढांगूपीर, मैरा, गंगवाल और अन्य कई इलाकों में सक्रिय है। यहां अवैध खनन के जरिये निकाले जा रहे रेत, बजरी और पत्थर के कारण चक्की खड्ड अपनी वास्तविक सतह से कई मीटर तक नीचे चली गई है, इससे भूमिगत जलस्तर में लगातार गिरावट हो रही है। आईपीएच विभाग के नूरपुर डिविजन के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार ने माना कि अवैध खनन के कारण खड्डों के किनारे जल स्रोतों पर स्थापित वाटर सप्लाई और इरीगेशन स्कीमों के सोर्स का लेवल नीचे जाने से जल योजनाओं के जलस्तर में गिरावट आ रही है।
इनसेट-1

अवैध खनन पर कोई लगाम नहीं
प्रदेश हाईकोर्ट की सख्ती के चलते करीब चार साल पहले कंडवाल, सुल्याली, छतरोली, नागाबाड़ी, टीका पैल और टिप्परी खड्ड में अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस की एक रिजर्व बटालियन भी तैनात की गई थी, लेकिन महज 10 दिन बाद ही कथित राजनीतिक दबाव के चलते बटालियन को वापस बुला लिया गया। इससे पहले भी मार्च 2010 में चक्की खड्ड और टीका पैल में अवैध खनन रोकने के लिए दो पुलिस चौकियां स्थापित की गई थीं। इसके बावजूद अवैध खनन पर कोई लगाम नहीं लगी है।
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इनसेट-2

अंतरराज्यीय सीमा की निशानदेही लटकी
पंजाब-हिमाचल की सीमा पर बहने वाली चक्की खड्ड की हदबंदी न होने के चलते पड़ोसी राज्य पंजाब का खनन माफिया धक्केशाही से अवैध खनन को अंजाम देता आ रहा है। हालांकि, गाहे-बगाहे पुलिस-प्रशासन या खनन विभाग छापामारी करता है तो ये लोग अक्सर इसकी भनक लगते ही जेसीबी और टिप्परों सहित पंजाब की सीमा में भाग कर पुलिस को गच्चा दे जाते हैं। वहीं, सीमांत क्षेत्र में माइनिंग साइट की मार्किंग न होने के चलते खनन माफिया की पुलिस-प्रशासन के साथ आंखमिचौनी रोकने के लिए इंटर स्टेट बार्डर की डिमार्ककेशन का मामला अभी तक सिरे नहीं चढ़ पाया है।
इनसेट-3

खनन विभाग में स्टाफ का टोटा
जिला कांगड़ा में सिर्फ पालमपुर और धर्मशाला में खनन विभाग के दो इंस्पेक्टरों के अलावा कांगड़ा, धर्मशाला, कंडवाल और जवाली में कुल चार असिस्टेंट खनन इंस्पेक्टर तैनात हैं। वहीं, नूरपुर के जवाली, इंदौरा, डमटाल में एक-एक और कंडवाल में दो खनन गार्ड तैनात हैं, जबकि धर्मशाला के बाद अब नूरपुर में भी एक खनि अधिकारी तैनात किया गया है। स्टाफ की कमी के चलते बिना सिक्योरिटी और गाड़ी के खनि अधिकारी भी रात को खनन माफिया के ठिकानों पर छापामारी करने से कतराते हैं।
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नूरपुर स्थित खनि अधिकारी नीरज कांत ने बताया कि सीमांत क्षेत्र की खड्डों में अवैध खनन रोकने के लिए समय-समय पर छापामारी होती है। आईपीएच विभाग की स्कीमों का सवाल है तो कस्डोडियन डिपार्टमेंट होने के नाते विभागीय अधिकारियों को भी अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करने की शक्तियां दी गई हैं।
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