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एक साल में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के पैसे से लगे सिर्फ भूमिगत कूड़ेदान

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हरीश चंद्र
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धर्मशाला। परियोजना प्रबंधन सलाहकार (पीएमसी) न मिलने के कारण पूरे देश में सूबे का एक मात्र स्मार्ट सिटी पोजेक्ट पिछड़ गया है। इसके लिए केंद्र सरकार के आवासीय एवं शहरी विकास मंत्रालय ने भी लताड़ लगाई है। एक साल में धर्मशाला शहर में स्मार्ट सिटी परियोजना के पैसे से सिर्फ भूमिगत कूड़ादान ही स्थापित हुए हैं। अक्तूबर 2016 के अंत तक स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत धर्मशाला को 208 करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ था, लेकिन परियोजना प्रबंधन सलाहकार न मिलने के कारण विकास कार्यों को गति नहीं मिल पाई है।
इनसेट
कब क्या हुआ
जुलाई 2016 में धर्मशाला के लिए स्मार्ट सिटी की घोषणा हुई। अगस्त 2016 में स्मार्ट सिटी के लिए कंपनी का गठन किया गया। अक्तूबर के अंत तक केंद्र और प्रदेश सरकार से 208 करोड़ रुपये के राशि जारी हुई। इसी महीने परियोजना प्रबंधन सलाहकार के लिए टेंडर प्रक्रिया अमल में लाई गई, लेकिन सिर्फ एक ही आवेदन आने के कारण टेंडर रद्द हुआ। उसके बाद रिटेंडरिंग की गई। 10 सितंबर 2017 में परियोजना प्रबंधन सलाहकार तय होने के बाद स्मार्ट सिटी परियोजना का काम आगे बढ़ाना शुरू हुआ।
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73 सब प्रोजेक्टों पर होना है काम
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत धर्मशाला शहर में 73 सब प्रोजेक्टों पर काम होना है, लेकिन अभी तक धतराल पर सिर्फ भूमिगत कूड़ादान लगे हैं। भूमिगत कूड़ादान लगाने का काम भी पूरा नहीं हो पाया है। भूमिगत कूड़ादान भी बिना सेंसर के लगा दिए हैं, जबकि उसमें प्रोजेक्ट के तहत भूमिगत कूड़ादानों में सेंसर लगाने का भी प्रावधान था।
इनसेट
केंद्र सरकार ने लगाई लताड़
केंद्र सरकार के आवासीय एवं शहरी विकास मंत्रालय ने इसी सप्ताह दिल्ली में स्मार्ट सिटी परियोजना की समीक्षा बैठक की। जिसमें धर्मशाला और गुवाहाटी स्मार्ट सिटी की परियोजना में विकास कार्य न के बराबर होने का मामला सामने आया है। जिसके लिए स्मार्ट सिटी धर्मशाला को भी लताड़ लगी है।
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कोट्स
परियोजना प्रबंधन सलाहकार न मिलने के कारण विकास कार्य समय पर शुरू नहीं हो पाए हैं। अब पीएमसी मिलने के बाद स्मार्ट सिटी परियोजना के काम को गति दी जाएगी।
-विजय कुमार, नगर निगम धर्मशाला के आयुक्त
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