ढाई क्विंटल घी और सूखे मेवों से होगा भोले का शृंगार
मंदिर न्यास ने शिवलिंग पर घृतमंडल चढ़ाने की रूपरेखा की तैयार
सात दिन के बाद घी को प्रसाद के रूप में किया जाएगा वितरित
राजकुमार सूद
बैजनाथ(कांगड़ा)। ऐतिहासिक शिव मंदिर के गर्भ गृह में मां पार्वती और भगवान शिव के रूप में स्वयंभू पवित्र शिवलिंग पर मकर संक्रांति पर ढाई क्विंटल देसी घी और सूखे मेवों का घृतमंडल तैयार होगा। मंदिर न्यास नौ जनवरी से त्योहार की तैयारियों को अंतिम रूप देगा। इस बार घृतमंडल के लिए ढाई से तीन क्विंटल के बीच घी और मेवों से शिवलिंग तैयार होगा। मकर संक्रांति के दिन मंदिर पुजारियों की देखरेख में दोपहर बाद से शिवलिंग पर घी का घृतमंडल तैयार करने का कार्य शुरू होगा और देर रात दस बजे तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। घृतमंडल के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले घी को ग्यारह जनवरी से पिघलाने और बाद में उसके पेड़े बनाने का कार्य शुरू होगा। घी को पिघलाने के बाद 101 मर्तबा ठंडे पानी से धोने के बाद ही इन पेड़ों को अंतिम रूप दिया जाएगा। दो दिन तक घी के पेड़ों को सुरक्षित रखने के बाद मकर संक्रांति के दिन इनका प्रयोग किया जाएगा। मकर संक्रांति के बाद के सात दिनों तक शिवलिंग घृतमंडल चढ़े शिवलिंग के रूप में नजर आएगा। मंदिर पुजारी सुरिंद्र आचार्य के अनुसार सात दिन तक पवित्र शिवलिंग पर लेप के रूप में चढ़े रहना बाला यह घी औषधि का रूप धारण कर लता है। चर्म रोगों के निवारण के लिए लाभप्रद रहता है। मकर संक्रांति के सात दिन के बाद इस घी को प्रसाद के रुप में वितरित किया जाएगा। मंदिर न्यास के ट्रस्टी अनिल शर्मा ने बताया कि नौ जनवरी से विधिवत रूप से घी को एकत्रित करने का कार्य शरू होगा।