अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। गठन के बाद जयराम सरकार ने कांगड़ा में अपना पहला कदम रखते ही वायदा किया था कि वह युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरेगी। लेकिन, वीरवार को रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे सरकारी व्यवस्था से उपेक्षित युवा दूसरी राजधानी धर्मशाला की सड़क पर ही किताबें लेकर पढ़ने बैठ गए।
देश का भविष्य सुबह जैसे ही सड़क पर बैठ गया तो धर्मशाला पहुंची सरकार के अफसर अचानक सक्रिय होकर युवाओं को मनाने पहुंच गए। युवाओं की नाराजगी रोजगार के लिए नहीं, बल्कि पढ़ाई का खुशनुमा माहौल नहीं मिलने को लेकर थी। युवाओं का आरोप था कि जिला पुस्तकालय धर्मशाला में अव्यवस्था के चलते वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। अव्यवस्था के बारे में कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को बताया लेकिन किसी ने कोई पहल नहीं की। लेकिन, वही अधिकारी सरकार के धर्मशाला में होने पर अचानक जाग गए जब नाराज युवा सड़क पर पढ़ने बैठ गए। नाराज युवाओं ने विरोध प्रदर्शन स्वरूप सड़क पर बैठकर पढ़ाई की। सुबह युवा जिला पुस्तकालय के अध्ययन कक्षों में बैठने की बजाय बाहर सड़क के दोनों ओर किताबें लेकर पढ़ने बैठ गए। युवाओं के प्रदर्शन का पता लगने पर सरकारी अमला वहां पहुंचा और युवाओं की समस्याएं भी सुनीं। कई समस्याओं का समाधान मौके पर किया गया, तो कई के समाधान का आश्वासन दिया गया।
युवाओं ने प्रदर्शन दिन भर जारी रखा। इसी बीच सड़क से गुजर रहे प्रदेश सरकार के प्रधान शिक्षा सचिव भी वहां रुक गए। समस्या को सुनकर प्रधान शिक्षा सचिव बिना स्टाफ औचक निरीक्षण के लिए पुस्तकालय में पहुंचे। उन्होंने शिक्षा निदेशक को पुस्तकालय में पेश आ रही समस्याओं का हल करने के आदेश दिए।
इन समस्याओं का हल करने के आदेश
शिक्षा सचिव के आदेशों के बाद शिक्षा निदेशक डॉ. अमर देव सिंह और एडीएम कांगड़ा केके सरोच मौके पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने समस्याओं का जायजा लिया। आदेश के बाद तय हुआ कि गर्मियों में लाइब्रेरी खुलने का समय सुबह छह से सायं 10 बजे तक करने, सर्दियों में सुबह आठ से सायं आठ तक का समय निर्धारित किया। रविवार को पेयजल टंकियों की सफाई प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में युवा स्वयं करेंगे। इसके अलावा शौचालयों की सफाई व्यवस्था और वहां ताले न लगाने के आदेश भी दिए गए। पुस्तकालय में अध्ययन कक्ष में लाइब्रेरी की सदस्यता के बिना भी बैठने की अनुमति होगी। अध्ययन कक्ष में पहले आओ, पहले पाओ की स्थिति रहेगी।