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नूरपुर में अभी नहीं तो कभी नहीं जैसे हालात

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रितेश महाजन
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नूरपुर (कांगड़ा)। प्रदेश की राजनीति में अहम स्थान रखने वाले नूरपुर विस क्षेत्र के चुनाव परिणाम पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। जाहिर तौर पर इस बार चुनाव नतीजे सियासी दिग्गजों के साथ नूरपुर हलके की भावी राजनीति की दशा और दिशा भी तय करेंगे।
लिहाजा जैसे-जैसे मतगणना की तारीख नजदीक आ रही है। वैसे-वैसे प्रत्याशियों के अलावा उनके समर्थकों और हलके के मतदाताओं की धुकधुकी भी बढ़ने लगी है। इस सियासी कशमकश के बीच हलके के दो राजनीतिक दिग्गजों की नाक का सवाल बनी चुनावी जंग को काफी रोचक बना दिया है। खासकर इस बार चौदह साल के सियासी बनवास के बाद भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले पूर्व विधायक राकेश पठानिया के लिए अभी नहीं तो कभी नहीं जैसे हालात बनते दिख रहे हैं तो वहीं, कांग्रेस की टिकट पर तीसरी बार चुनावी दंगल में उतरे फील्ड मार्शल स्वर्गीय सत महाजन के बेटे एवं वर्तमान विधायक अजय महाजन की सियासी प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। यह तीसरा मौका है जब नूरपुर हलके के दोनों सियासी दिग्गज सियासी पिच पर आमने-सामने हैं।
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नूरपुर के राजनीतिक इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो जहां हमेशा पार्टी के बजाय व्यक्ति विशेष का फैक्टर हावी रहा है। हालांकि नूरपुर विस क्षेत्र हमेशा से ही कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा है और यहां की सियासत कई सालों तक पूर्व मंत्री केवल सिंह पठानिया और स्वर्गीय सत महाजन के ईद-गिर्द घूमती रही है, जबकि भाजपा की हर चुनाव में जमानत जब्त होती रही है, लेकिन 1996 के उपचुनाव में पहली बार भाजपा के युवा तुर्क राकेश पठानिया ने कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी और 1998 में बतौर भाजपा प्रत्याशी चुनाव जीतकर पहली मर्तबा कांग्रेस के गढ़ में कमल खिलाने का इतिहास रचा। 2007 के विस चुनाव में शांता खेमे ने मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के सियासी हनुमान कहे जाने वाले राकेश पठानिया का टिकट कटवाकर महिला नेत्री मालविका पठानिया को थमा दिया। बावजूद इसके राकेश पठानिया ने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी तत्कालीन राजस्व मंत्री सत महाजन के बेटे अजय महाजन को 4165 मतों के अंतर से पटकनी दी थी। 2012 में बतौर कांग्रेस प्रत्याशी अजय महाजन ने पहली बार जीत दर्ज की, जबकि भाजपा का लगातार दूसरी मर्तबा भी नए चेहरे पर दांव उल्टा पड़ा। 2012 में भी मुख्य मुकाबला अजय महाजन और राकेश पठानिया के ही बीच रहा। इसमें लगातार दूसरी मर्तबा बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव में उतरे राकेश पठानिया को कांग्रेस के अजय महाजन ने 3367 वोटों से हराकर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। कुल मिलाकर इस सियासी मुकाबले में एक-एक से बराबरी पर चले रहे दोनों धुरंधरों में से इस बार कौन बाजी मारेगा, इसका पता तो 18 दिसंबर को ईवीएम मशीनें खुलने के बाद ही लग पाएगा।
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