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पैसा और लक्ष्मी में अंतर : मोरारी बापू

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पैसा और लक्ष्मी में अंतर : मोरारी बापू
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ज्वालामुखी (कांगड़ा)। ज्वालामुखी के गंजू के बाग के पंडाल में दूसरे दिन मोरारी बापू ने हनुमान स्तुति के साथ कथा का शुभारंभ किया। इस दौरान हनुमान चालीसा से पूरा पंडाल गूंज उठा। मोरारी बापू ने कहा कि रामकथा का रस सब रसों से मीठा है। शिव और शक्ति का अनोखा मेल है। शिव की शक्ति ज्वाला रूप में विश्व में साक्षात विद्यमान है। बापू ने कहा कि प्रेम एक आग है। इसमें उतरकर ही परमात्मा की प्राप्ति संभव है। कौशल्या के घर में परमात्मा था इसीलिए वहां पर राम प्रकट हुए। उन्होंने कहा कि अगर आदमी की मानसिकता सत्य की उपासना वाली हो तो परमात्मा सभी मजबूरियां मिटा देता है। असत्य आता है तो प्रेम का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। बापू ने कहा कि पैसा और लक्ष्मी में बड़ा अंतर होता है। ऐसा धन जिसे पर सेवा में बांटने में कष्ट होता हो, वह पैसा होता है और ऐसा धन जिसे जनसेवा में खुलकर लगाया जाए वह लक्ष्मी का रूप होता है। बारिश के कारण कथा देरी से दोपहर को शुरू हुई।
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