धर्मशाला। स्मार्ट सिटी धर्मशाला में लावारिस कुत्तों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। शहर में 3,000 से अधिक लावारिस कुत्ते घूम रहे हैं लेकिन इनकी संख्या नियंत्रित करने के लिए नसबंदी अभियान की रफ्तार बेहद धीमी है।
डेढ़ साल में महज 271 कुत्तों की ही नसबंदी हो पाई है। उधर, कांगड़ा जिले में सिर्फ तीन माह में कुत्तों के काटने के 2,580 मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में शहर में कुत्तों के बढ़ते झुंड राहगीरों, बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं।
मंगलवार को धर्मशाला में हुई दिशा की बैठक में सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने लावारिस कुत्तों की बढ़ती संख्या और कुत्तों के काटने के मामलों पर चिंता जताई। उन्होंने सभी नगर निकायों के अधिकारियों को नसबंदी अभियान तेज करने और अगली बैठक तक स्थिति में सुधार लाने के निर्देश दिए।
दो एनजीओ कर रहे नसबंदी और टीकाकरण
बैठक में नगर निगम धर्मशाला के आयुक्त जफर इकबाल ने बताया कि धर्मशाला में दो एनजीओ कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण कर रहे हैं। शहर में 100 फीसदी कुत्तों का टीकाकरण किया जा चुका है, जबकि 271 कुत्तों की नसबंदी हुई है। अभियान में तेजी लाई जाएगी। इसके अलावा एक अन्य संस्था के साथ एमओयू किया जाएगा, जो विभिन्न स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाएगी।
डॉग कैचर नहीं, निकायों और पंचायतों की जिम्मेदारी
बैठक में पशुपालन विभाग की उपनिदेशक डॉ. सीमा गुलेरिया ने बताया कि विभाग के पास दवाएं और टीके उपलब्ध हैं, लेकिन कुत्तों को पकड़ने के लिए डॉग कैचर नहीं हैं। कुत्तों को पकड़ने की जिम्मेदारी संबंधित नगर निकायों और पंचायतों की है। विभाग की जिम्मेदारी टीकाकरण और नसबंदी की है।