अमर उजाला ब्यूरो
पालमपुर (कांगड़ा)। पुरानी पेंशन बहाली की मांग को जायज ठहरा रहे राजकीय अध्यापक संघ को अफसोस है कि उनकी यह मांग नहीं मानी जा रही है। इसके लिए वे कई सालों से संघर्ष कर रहे है, लेकिन उनकी इस मांग को टाला जा रहा है।
प्रदेश उपाध्यक्ष छामछु सुब्बा, पंचरुखी प्रधान प्रवीण कुमार, पालमपुर ब्लॉक अध्यक्ष ओंकार चंद, फतेहपुर ब्लॉक अध्यक्ष राकेश गौत्तम, भवारना ब्लॉक अध्यक्ष दिनेश कुमार, पंचरुखी ब्लॉक महासचिव अजय कलोत्रा, उपप्रधान पुनीत शास्त्री, प्रेस सचिव गौरव सूद, बलदेव कुमार, दिनेश पठानिया, अनिल कुमार, शेलेंद्र सूद, कपिल अंगारिया, सुरेश जसवाल और मनदीप सिपहिया का कहना है कि जब हकों की बात उठती है तो लोगों को उनके जायज हकों से महरूम कर ठोकरें खाने को मजबूर किया जाता है, लेकिन अपने लिए सत्तारूढ़ दल खजाने खाली होने के बाद भी सुविधाएं ले लेते हैं, जबकि दूसरी ओर आज पूरे देश के कर्मचारियों को बुढ़ापे में बिना पेंशन के लिए ठोकरें खाने पर मजबूर किया जा रहा है। कारण यह है कि सरकारों के अनुसार प्रशासनिक खर्चे बढ़ गए हैं। इस कारण 2003 के बाद रिटायर होने वाले कर्मियों की पेंशन बंद की गई। संघ ने कहा कि बढ़े हुए प्रशासनिक खर्चों का हवाला देकर इस पेंशन को बंद कर दिया जाता है। जब कर्मियों की पेंशन बंद की गई तो क्या किसी राजनीतिक पार्टी ने इसका विरोध किया, यही पेंशन विधायकों और सांसदों की बंद कर दी जाए तो क्या राजनीतिक दल इसका विरोध नही करेंगे। कहा कि आज भी कर्मचारियों को हाउस रेंट 450 रुपये प्रतिमाह दिया जाता है। क्या इस महंगाई के दौर में 450 रुपये में कहीं भी क्वार्टर मिलते हैं।
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