धर्मशाला। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शनिवार दोपहर शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा का एसडीएम दफ्तर धर्मशाला में खुद साथ जाकर नामांकन भरवाया। शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा के साथ मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के अलावा कांगड़ा के विधायक पवन काजल, बैजनाथ के एमएलए किशोरी लाल, केसीसी बैंक के चेयरमैन जगदीश सपहिया भी मौजूद रहे।
नामांकन भरने के बाद सुधीर शर्मा ने दाड़ी में रैली निकाल कर शक्ति प्रदर्शन किया। दाड़ी जनसभा में शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने पूर्व मंत्री किशन कपूर पर पहली बार खुलकर भड़ास निकाली। उन्होंने कहा कि मोदी और शाह ने जब टिकट काट दिए तो पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल और पूर्व मंत्री रोने बैठ गए। ऐसे नेता पहले तो खुद रोते हैं, फिर जनता को रुलाते हैं। ऐसे लोग लालच में पद को आगे रखते हैं और आम आदमी को पीछे। पिछले विस चुनाव में मेरा भी टिकट कटा था। ज्वालाजी से जब मुझे टिकट मिलने की सूचना मिली तो मैंने संजय रत्न को फोन कर कहा कि मुझे किसी पद की लालसा नहीं है। मैं ज्वालाजी से चुनाव नहीं लड़ूंगा। फिर मुझे धर्मशाला की जनता ने अपना बेटा माना और मैंने भी धर्मशाला की तकदीर बदलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मुझे सीएम ने छोटी आयु में मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी। मेरे कार्यकाल पर कोई उंगली नहीं उठा सकता, जबकि पूर्व मंत्री के पास भी मेरे जैसे विभाग थे लेकिन वह उन्हें ठीक से चला नहीं पाए। इससे पहले समर्थकों ने सुधीर को कंधों पर उठाकर मंच तक पहुंचाया। जनसभा में नगर निगम की मेयर रजनी व्यास, डिप्टी मेयर देवेंद्र जग्गी, गद्दी नेता मनोज कुमार, गोरखा नेता एवं पार्षद सविता कार्की , कांग्रेस नेता विजय इंद्र कर्ण, पंचायत प्रधान एसोसिएशन के प्रधान ओम बहादुर गुरुंग, बीडीसी चेयरमैन रविंद्र चौधरी, ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष राकेश धीमान, शहरी कांग्रेस अध्यक्ष आरपी चोपड़ा, शहरी कांग्रेस महासचिव शकुन मनकोटिया आदि मौजूद रहे।
क्या मैं गुंडा दिखता हूं
जनसभा में सुधीर शर्मा ने कहा कि मुझ पर विपक्ष के कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि मैं गुंडा हूं। सुधीर ने जनता से पूछा कि क्या मैं गुंडा दिखता हूं। मैंने कौन सी गुंडागर्दी की। धर्मशाला में पांच वर्ष पहले क्या माहौल था। खनियारा को खानों को हमने संजीवनी देने का प्रयास किया जबकि पहले यहां रोज गुंडागर्दी के माहौल में स्लेटें टूटती थीं। स्मार्ट सिटी, नगर निगम और दूसरी राजधानी का दर्जा देकर कांग्रेस ने धर्मशाला का सम्मान बढ़ाया। जबकि भाजपा ने तो नगर निगम, दूसरी राजधानी और स्मार्ट सिटी का हमेशा विरोध किया।