नूरपुर (कांगड़ा)। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग 154 को फोरलेन में परिवर्तित करने के लिए केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय की प्रस्तावित लगभग 4 हजार करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर हाईवे किनारे बसे लोगों की धड़कने तेज हो गई हैं। खासकर इस प्रस्तावित फोरलेन की लाइनमेंट का काम शुरू होने से नेशनल हाईवे के किनारे भू-मालिकों समेत व्यापारिक प्रतिष्ठानों और रिहायशी इमारतों के फोरलेन की जद में आने की अटकलों से लोगों को उजड़ने की चिंता सताने लगी है। जानकारी के मुताबिक इस परियोजना को जल्द सिरे चढ़ाने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने प्रोजेक्ट डायरेक्टर की नियुक्ति करने के साथ ही पालमपुर में क्षेत्रीय कार्यालय भी खोल दिया है, जबकि इस प्रस्तावित फोरलेन की लाइनमेंट के कार्य के लिए कंसलटेंट की पहले ही नियुक्ति की जा चुकी है। ऐसे में इस फोरलेन प्रोजेक्ट की कार्य प्रगति को देखते हुए नेशनल हाईवे के किनारे बसे कंडवाल, राजा का बाग, नागाबाड़ी, जसूर, न्याजपुर, नूरपुर तथा कोटला के बाजारों के साथ-साथ रिहायशी मकानों में रहने वाले लोगों पर विस्थापन की तलवार लटकने लगी है। यूं कहें कि पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग के विस्तारीकरण को लेकर अब लोगों की नजरें फोरलेन की लाइनमेंट पर टिक गई हैं। इसकी वजह है कि अगर यह प्रस्तावित फोरलेन जसूर, नूरपुर व कोटला के बाजारों से होकर गुजरता है तो इससे हाईवे किनारे की कुछ रिहायशी इमारतों के अलावा न्याजपुर, नूरपुर तथा कोटला जैसे संकरे बाजार तो लगभग पूरी तरह से फोरलेन की जद में आ जाएंगे। जहां तक जसूर बाजार की बात है तो जहां हाल ही में करोड़ों खर्च कर नेशनल हाईवे के विस्तारीकरण का कार्य पूरा करवाया गया है, जिसके तहत भारी वाहनों की आवाजाही के लिए डबल लेन के अलावा छोटे और दोपहिया वाहनों के लिए सर्विस लेन का भी निर्माण किया गया है। यहां से फोरलेन के गुजरने की सूरत में इसके विस्तारीकरण पर खर्च करोड़ों की राशि बेकार जाएगी तो वहीं, न्याजपुर, नूरपुर और कोटला जैसे बेहद तंग बाजारों से फोरलेन निकालने पर कइयों को विस्थापन का दर्द झेलना पड़ेगा। फोरलेन प्रोजेक्ट की मंजूरी से पहले जुलाई 2014 में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय ने नूरपुर, ज्वालामुखी, बैजनाथ-पपरोला समेत छह बाईपास मंजूर किए थे लेकिन बाईपास के निर्माण की कवायद कागजों से आगे नहीं बढ़ पाई। इसके बाद 2016 में पठानकोट-मंडी नेशनल हाईवे को फोरलेन बनाने की हरी झंडी मिलने से पूर्व में स्वीकृत बाईपास रद्द कर दिए गए। कुल मिलाकर इस प्रस्तावित फोरलेन प्रोजेक्ट की लाइनमेंट को लेकर संशय से लोगों को उजड़ने का डर सताने लग पड़ा है। उधर, एनएच के एक्सईएन अनिल संगराई ने बताया कि पूर्व में प्रस्तावित बाईपास के निर्माण की कागजी प्रक्रिया फोरलेन प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद रोक दी गई थी। अब फोरलेन प्रोजेक्ट के कार्य को एनएचएआई ही देख रहा है।