अमर उजाला ब्यूरो
डरोह (कांगड़ा)। क्षेत्र में बारिश न होने के चलते पहाड़ी क्षेत्रों के किसान अपनी रबी की फसल की बिजाई नहीं कर पाए हैं। ढाई माह पहले बीजी गेहूं की फसल सूखने लगी है। अगर बारिश नहीं हुई तो कृषि विभाग के आंकड़े भी गड़बड़ा जाएंगे।
उप तहसील भवारना से निचले क्षेत्रों की लगभग 25 फीसदी जमीन सिंचाई के लिए कूहलों पर और 75 फीसदी भूमि बारिश पर निर्भर करती है। कुछ किसानों ने बिना सिंचाई के ही अपने खेतों में गेहूं बीज दी थी। अब बारिश न होने से किसानों का लाखों रुपये का गेहूं का बीज और खाद भी बर्बाद हो रहे हैं। किसानों को परिवार के पालन पोषण की चिंता सताने लगी है।
क्षेत्र की लगभग दर्जनों कूहलें सूखी हैं। खड्डों में पानी का जलस्तर भी कम हो चुका है। बारिश न होने से खेतों में गेहूं नहीं के बराबर निकली है।
हैंजा पंचायत के उपप्रधान सुरेश कुमार ने बताया कि अधिकतर किसान बारिश पर निर्भर हैं। जल्द बारिश नहीं हुई तो खेती पूरी तरह से नष्ट हो जाएगी। मरूहं पंचायत के उपप्रधान चंद्र किशोर का कहना है कि उनके यहां लोग रोज बारिश के आने का इंतजार कर रहे हैं। गढ़ जमूला, बस्दी, मूंढी, पटवाग, लींजण, कुरल, मंडप, बोदा, नागणी, बागड़ू, गरला, मट्ट, रड़ा आदि क्षेत्रों में भी गेहूं की फसल खराब हो रही है।
क्षेत्र में बागवानों का भी यही हाल है। लीची के पेड़ों पर ठीक तरह से कोंपलें भी नहीं आ पा रही हैं। बागवान राजीव शर्मा बागड़ू, ओम प्रकाश शर्मा डरोह, त्रैंम्बू, मरूहं से विजय नाग, बागड़ू से रमेश चंद, किशोरी लाल, सरदार सिंह, पंकज ने बताया कि इस बार उन्हें लीची की बहुत ही कम पैदावार होने की उम्मीद है।
47 लाख से बनाई योजना बेकार
खैरा (कांगड़ा)। सुलह और जयसिंहपुर हलके के खैरा और आसपास के गांवों के खेतों को तर करने के लिए विभाग की ओर से सिंचाई की योजना करीब 3 दशक पहले बनाई गई थी। 2006 में इसके जीर्णोद्धार और स्टेज 2 पर भी लगभग 47 लाख की भारी भरकम राशि खर्च कर 202-25 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि को सिंचित करने का प्रावधान किया गया था। लेकिन लाखों रुपये के खर्च के बाद भी इस सिंचाई योजना का लाभ कृषकों को नही मिल रहा है। मशीनों का वार्षिक रखरखाब और विद्युत का लाखों का बिल भी विभाग वहन कर रहा है। विभाग की मानें तो लोगों की ओर से मांग करने के कारण वे स्कीम का लाभ नहीं ले पा रहे है। गांव के प्रगतिशील किसान रमेश, कुलदीप, प्रीतम, कमेर, हरीश, हरवंश, रवि पाल, किशोरी लाल, जगत राम, सुरेश, महिंद्र, सरवन, अशोक आदि का कहना है कि फसल को पानी की इस समय अत्यंत आवश्यकता है, परंतु विभाग ने भी बरसात के बाद अभी तक मशीन का ट्रायल तक नहीं लिया है। कहीं कोई रुकावट तो नही है। डरोह स्थित विभाग के कार्यालय में से एसडीओ अश्वनी शर्मा का कहना है कि विभागीय कर्मियों को एक दो दिन में ट्रायल देने को कहा जाएगा है, उसके बाद ही सही जानकारी मिल पाएगी, ताकि किसानी को मांग पर सिंचाई सुविधा सुचारु रूप से मिल सके।
किसान बोले-फसलों को होगा नुकसान
राजा का तालाब (कांगड़ा)। किसानों को आने वाले दिनों में बारिश न होने की वजह से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। स्थानीय किसानों चैन सिंह, बख्शीश सिंह, करण सिंह, कुलदीप सिंह, करतार चंद, दलजीत सिंह, किशोर चंद, कुशाल सिंह, प्रीतम मनकोटिया, सुदर्शन सिंह और जरम चंद का कहना है कि एक दो दिन के अंदर बारिश न होने की वजह से गेहूं, पशु चारे, सब्जियों बागवानी में आम, लीची, नींबू की फसल को भारी नुकसान हो सकता है। कृषि विभाग नूरपुर के विषयवाद विशेषज्ञ सुनील कुमार का कहना है कि मौसम विभाग के अनुसार तीन दिन तक बारिश के आसार हैं। लेकिन, अगर बारिश नहीं होती है, तो फसल, सब्जियों और पशु चारे से किसानों को जूझना पड़ सकता है। किसानों को अगर फसल में पीला रतुआ या अन्य कोई समस्या नजर आती है, तो इसके लिए किसान भाई कृषि विभाग नूरपुर के विषय वाद विशेषज्ञ कार्यालय के दूरभाष नंबर 01893- 221344 पर संपर्क साध कर सलाह ले सकते हैं। फसल में पीला रतुआ की समस्या से निजात पाने के लिए विभाग के पास प्रचुर मात्रा में दवाई उपलब्ध है। पीले रतुए से निपटने के लिए किसान भाई इस दवाई का प्रयोग करके लाभ उठा सकते हैं।