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अनुबंध से नियमित हुए अध्यापकों की वेतन विसंगति गलत

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पालमपुर (कांगड़ा)। राजकीय अध्यापक संघ ने अनुबंध के नियमित हो रहे अध्यापकों को अलग वेतनमान दिए जाने पर कड़ा रोष जताया है। संघ का कहना है कि शिक्षा विभाग की ओर से अनुबंध से नियमित हो रहे अध्यापकों को बराबर वेतन दिया जाएगा। वेतन में विसंगति पर संघ के राज्य अध्यक्ष एसएस रांटा और सुभाष पठानिया रोष जताया है।
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संघ के जिला प्रधान पृथी सिंह राणा, महासचिव छामछु सुब्बा, उपाध्यक्ष तेजपाल, चरणजीत सिंह संधू, पालमपुर ब्लॉक के अध्यक्ष ओंकार चंद, पंचरुखी के अध्यक्ष प्रवीण कुमार, डॉ अरुण
दत्त, दिनेश पठानिया, मीनाक्षी हांडा, शेलेंद्र सूद, फतेहपुर ब्लॉक के अध्यक्ष राकेश गौतम, करण ठाकुर, अनिल कुमार, बिंदु राणा, पंचरुखी ब्लॉक महासचिव अजय कलोत्रा, पुनीत शास्त्री, गौरव सूद, मनदीप सिपहिया, सुरेश कुमार, संजीव मंगोत्रा, अशोक मंढोत्रा, इंद्रजीत सिंह राणा, मुनीश शर्मा, कपिल अंगारिया और विवेक कुमार आदि अध्यापकों ने शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि नियमित हो रहे सभी अध्यापकों को बराबर का वेतनमान दिया जाए। इन अध्यापक पदाधिकारियों ने कहा कि अध्यापकों और कर्मचारियों के उत्पीड़न के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। कभी पेंशन बंद कर दी जाती है, कभी आर्थिक लाभों से वंचित किया जाता है। कभी वेतन विसंगतियों में अध्यापकों को उलझाया जा रहा है। 2000 से पहले दूसरी पॉलिसी के तहत रखे गए अनुबंध अध्यापकों को जब 2010 में नियमित किया गया था, तो उन्हें 14430 का शुरुआती स्केल दिया गया था, लेकिन, इसके बाद के नियमित हुए अध्यापकों के लिए वेतनमान को घटाकर 13900 कर दिया, जो कि अनुबंध समय का आरंभिक स्केल था। सात साल बाद नियमित होने पर फिर से विभाग यही स्केल देने पर उतारु है।
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