ज्वालामुखी(कांगड़ा)। ज्वालामुखी के सुरानी में तेल की खोज में एक बार फिर से ऑयल एंड नेचुरल गैस कमीशन (ओएनजीसी) को निराशा हाथ लगी है। ज्वालामुखी में तेल के भंडार होने की उम्मीद पर पानी फिर गया है। तेल की खोज में फेल हुई कंपनी अब यहां से बोरिया बिस्तर समेट रही है।
तेल और प्राकृतिक गैस की तलाश को ऑयल एंड नेचुरल गैस कमीशन (ओएनजीसी) सुरानी में चिह्नित साइट पर कई दिनों से उम्मीद के साथ डटी हुई थी। हाथ खाली रहने के बाद जांच टीम ने एक बार फिर से वापस लौटने की तैयारी शुरू कर दी है। तेल खोजने के लिए सुरानी साइट पर लगाई गई रिंग बंद कर दी गई हैं।
टीम करीब दो महीने पहले यहां पर गाड़ियों में सारा सामान लादकर सुरानी में साइट फाइनल कर तेल और प्राकृतिक गैस की खोज में सुरानी में पंहुची थी। स्थानीय लोगों डिंपल शर्मा, बबलू, रमेश और प्रताप राणा ने बताया कि अभी तक टीम को निराशा ही हाथ लगी है। तेल और प्राकृतिक गैस ज्यादा मात्रा में जमीन से नहीं निकल पाए। क्षेत्रवासियों में भी इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी उत्साह देखा गया था कि ओएनजीसी के यहां आने से रोजगार के जहां साधन बढ़ेंगे। कारोबार में भी बढ़ोतरी होगी।
इनसेट
हर बार हाथ लगी निराशा
ज्वालामुखी विस क्षेत्र में तीन साल पहले टिहरी में भी ओएनजीसी की ओर से तेल और प्राकृतिक गैस खोजने के लिए प्रयास किए गए। लेकिन, निराशा ही हाथ लगी। इससे पहले भी बग्गी नामक स्थान पर पेट्रोलियम पद्धार्थों की खोज मे वर्मा लगाया गया था। लेकिन, उसमें भी असफलता ही हाथ लगी। साल 2014 में एक बार फिर से जियोलॉजिकल सर्वे में यह बात सामने आई कि सुरानी में प्रचुर मात्रा में तेल और प्राकृतिक गैस मिलने की पूरी संभावना है। लेकिन, उस समय भी टीम वापस लौट गई।
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रोजगार की संभावनाओं के चलते हाथ लगी निराशा : दिलीप
सुरानी पंचायत के प्रधान दिलीप सिंह राणा ने बताया कि उनके पहले भी क्षेत्र में ओएनजीसी ने वर्मा लगाया है। पहले भी कई बार प्रयास हुए हैं, लेकिन, हर बार निराशा ही हाथ लगी है। यहां के बेरोजगार युवाओं को इस बार फिर से मशीनें पहुंचने से खुशी थी। लेकिन, इस बार भी तेल की खोज करने आई टीम ने रिंग बंद कर दी है। इससे यहां के लोगों में फिर से एक बार रोजगार और अन्य कारोबार की संभावनाएं निराशा में बदल गई हैं।
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