अमर उजाला ब्यूरो
बैजनाथ (कांगड़ा)। जिला कांगड़ा की दुर्गम घाटी बड़ा भंगाल के लोगों ने 96 हजार हेक्टेयर वन भूमि पर अधिकार के दावे जमा किए हैं। खंड स्तरीय कमेटी अध्यक्ष के समक्ष पेश किए गए दावे के अनुसार बताई गई 96 हजार हेक्टेयर भूमि वन भूमि धौलाधार वन्य जीव सेंच्चुरी के अंदर आती है। यह भूमि चौरासी धारों के नाम से भी जानी जाती है। इन धारों को बड़ा भंगाल, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू और चंबा से गर्मी के समय लगभग डेढ़ लाख भेड़-बकरियों की चराई के लिए 600 घुमंतू पशुपालक के डेरे इस्तेमाल करते हैं। साथ ही स्थानीय लोग अपनी आजीविका के लिए इन धारों में जड़ी-बूटी और अन्य उपयोगों के लिए निर्भर हैं।
धौलाधार वन्यजीव सेंक्चुरी बनने से इन धारों में स्थानीय और अन्य घुमंतू पशुपालकों के उपयोगों पर अंकुश लगा था। इसके विरोध में किसान सभा, बैजनाथ के सहयोग से स्थानीय लोगों ने अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष भी किया है। बड़ा भंगाल निवासी पवना कुमारी ने बताया कि अपने अधिकारों को बचाने के लिए काफी लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे। किसान सभा बैजनाथ के अध्यक्ष अक्षय जसरोटिया ने कहा कि चौरासी धारें में 96 हजार हेक्टेयर वन भूमि पर बड़ा भंगाल के निवासी और अन्य घुमंतू पशुपालकों को चराई का ठेका देते थे, लेकिन राज्य सरकार ने वेस्टिंग एक्ट के तहत यह वन भूमि अपने नाम कर ली और मालिक बन गई।