विस्थापित को श्रीगंगानगर में ही दें जमीन
कहा, नहीं तो दिल्ली जंतर-मंतर पर देंगे धरना
अमर उजाला ब्यूरो
जवाली (कांगड़ा)। पौंग बांध विस्थापित समिति की प्रदेश स्तरीय बैठक जवाली में हुई। बैठक की अध्यक्षता समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामपाल वर्मा ने की। उन्होंने कहा कि तीन जुलाई 2018 को हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के चीफ सेक्रेटरी की मीटिंग हुई थी। जिसमें फैसला लिया गया था कि विस्थापितों को श्रीगंगानगर की पांच तहसीलों में ही जमीन दी जाए, लेकिन अब पौंग विस्थापितों को जैसलमेर सहित अन्य वार्डर एरिया में जमीन दी जा रही है, जहां पर कोई भी मूलभूत सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा कि पौंग बांध विस्थापितों को यह फैसला कतई मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा हाई पावर कमेटी की 23वीं मीटिंग में निर्णय लिया गया था कि पौंग विस्थापितों को श्रीगंगानगर में जमीन दी जाए अन्यथा 47 साल का मुआवजा सहित जमीन की कीमत दी जाए, लेकिन इसको भी लागू नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पौंग बांध विस्थापित श्रीगंगानगर में ही जमीन लेंगे और अगर नहीं दी गई तो मजबूरन दिल्ली जंतर-मंतर पर शांतिपूर्वक धरना दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पौंग बांध विस्थापितों के लिए श्रीगंगानगर में रिजर्व 2.20 एकड़ जमीन में से कितनी जमीन पौंग बांध विस्थापितों को दी गई है और कितनी शेष बचती है, उसके बारे में बताया नहीं जाता है। उन्होंने कहा कि विस्थापित आज भी विस्थापित हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से मांग की है कि पौंग विस्थापितों को अतिशीघ्र मरब्बे दिलाए जाएं ताकि विस्थापितों को उनका हक मिल सके। इस मौके पर प्यारे लाल, मदन मोहन चौधरी, उत्तम चंद, सोम राज, राजिंदर कुमार, मदन लाल, संतोष कुमारी, सुदेश कुमारी आदि मौजूद रहे।