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नूरपुर में दस साल से आगे सरक रही सीवरेज योजना

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रितेश महाजन
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नूरपुर (कांगड़ा)। नूरपुर शहर के लिए प्रस्तावित सीवरेज प्रणाली करीब दस साल बीतने के बाद भी शहरवासियों के लिए अभी तक दूर की कौड़ी साबित हो रही है। वजह यह है कि पहले शुरुआती चार साल तक तो बजट के अभाव के चलते इस योजना का निर्माण शिलान्यास पट्टिका से आगे नहीं सरका। फिर जैसे-तैसे बौड़ में 1.5 करोड़ रुपये की लागत के ट्रीटमेंट प्लांट का काम शुरू हुआ, लेकिन इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन के लिए टुकड़ों में मिलने वाले बजट के चलते इसका निर्माण कार्य लगातार आगे सरकता जा रहा है।
हालत यह है कि सीवरेज योजना की अनुमानित लागत अब 15.63 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 22 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है। बजट आवंटन पर नजर दौड़ाएं तो पिछले साल सीवरेज के काम के लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय (यूडीए) से करीब एक करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था, जबकि चालू वित्त वर्ष में उक्त योजना के लिए प्रदेश सरकार या केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से सीवरेज के अधूरे काम को चालू करने के लिए फूटी कौड़ी तक जारी नहीं हुई। बीते 10 साल में सीवरेज के निर्माण पर अब तक करीब 908.54 लाख रुपये के कुल आवंटित बजट में से 837.49 लाख रुपये की धनराशि व्यय की जा चुकी है। उल्लेखनीय है कि पूर्व कांग्रेस शासनकाल में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने नूरपुर में 11 अप्रैल 2007 को 15.63 करोड़ की लागत से बनने वाली सीवरेज योजना का नींव पत्थर रखा था। इस योजना को पूरा करने के लिए चार साल का लक्ष्य रखा गया था, जिसे उक्त योजना की अनुमानित लागत बढ़ने के साथ ही हर साल आगे सरका दिया जाता है। ऐसे में ऊंट के मुंह में जीरे समान आवंटित किए जा रहे बजट से इस योजना का काम कब पूरा होगा, इसका जवाब फिलहाल किसी के पास कोई नहीं है। विभागीय सूत्रों की मानें तो सीवरेज योजना की कुल अनुमानित लागत का 60 फीसदी बजट तो सिर्फ पाइपों पर ही खर्च होने का अनुमान है और अभी तक सिर्फ योजना का लगभग 50 फीसदी ही काम पूरा हो पाया है। वहीं, वर्तमान में शहर में सीवरेज लाइन बिछाने के लिए संबंधित आईपीएच विभाग के पास लोनिवि, एनएच और फारेस्ट की क्लीयरेंस न होने के चलते सीवरेज का काम ठप पड़ा है।
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केंद्र ने वापस लौटाई संशोधित डीपीआर
सूत्रों की मानें तो आईपीएच विभाग ने वर्ष 2014-15 में सीवरेज की करीब 22 करोड़ रुपये लागत की संशोधित डीपीआर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को नवगठित नीति आयोग की स्वीकृति के लिए भेजी थी, जो कि बिना किसी निर्णय के प्रदेश सरकार को वापस लौटाई जा चुकी है, जबकि इस योजना को पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से भी बजट का कोई प्रावधान नहीं किया जा सका है।

अब तक 837 लाख हो चुके हैं खर्च
बजट आवंटन पर नजर दौड़ाएं तो सीवरेज योजना के लिए वर्ष 2006-07 में 20 लाख, वर्ष 2007-08 में 20 लाख, वर्ष 2008-09 में 141.05 लाख, वर्ष 2009-10 में 84.81 लाख, वर्ष 2010-11 में 53.64 लाख, वर्ष 2011-12 में 60 लाख, वर्ष 2012-13 में 125.68 लाख, वर्ष 2013-14 में 75 लाख, वर्ष 2014-15 में 150 लाख, वर्ष 2015-16 में 150 लाख और वर्ष 2016-17 में 118.36 लाख रुपये के बजट प्रावधान किया गया है। अब तक उक्त योजना पर करीब 837.49 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
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ट्रीटमेंट प्लांट इस साल चालू करने का लक्ष्य : विभाग
आईपीएच नूरपुर मंडल के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार ने माना कि बजट के अभाव के चलते सीवरेज का काम अधर में लटका हुआ है। हालांकि, उक्त योजना का लगभग 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और ट्रीटमेंट प्लांट को साल के अंत तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।
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