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बच्चादानी के मुखेके कैंसर का प्री-स्टेज में लग जाता है पता: रैना

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गर्भाश्य से पानी निकलने का शरीर की कमजोरी से कोई संबंध नहीं
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महिलाओं में बच्चादानी के कैंसर का शुरुआत में लग जाता है पता : डॉ. रैना
अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम में महिलाओं को किया जागरूक
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। बच्चादानी के मुख का कैंसर ही ऐसी बीमारी है, जिसका शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है। यह कैंसर विवाहिता और शारीरिक संबंध स्थापित कर चुकी महिलाओं को ही होता है। कुंवारी युवतियों को यह कैंसर नहीं हो सकता। स्वास्थ्य संबंधी यह जानकारी सोमवार को अमर उजाला की ओर से नारी सशक्तीकरण के लिए शुरू किए गए अपराजिता अभियान के तहत बीडीओ सभागार धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम में दी गई।
कार्यक्रम में नगर निगम धर्मशाला के शहरी आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह की सदस्यों की महिलाओं को फोर्टिस अस्पताल कांगड़ा की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. निधि रैना और स्वास्थ्य विभाग से जिला बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं टीकाकरण अधिकारी डॉ. चित्रा कौशल ने जागरूक किया।
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डॉ. निधि रैना ने बताया कि महिलाओं में महावारी, गर्भाश्य से पानी चलना, यूरिन इन्फेक्शन और महिलाओं में होने वाले कैंसर की जानकारी दी। स्वास्थ्य विभाग से जिला बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं टीकाकरण अधिकारी डॉ. चित्रा कौशल ने बच्चों की बीमारियों से संबंधित जानकारी दी।
डॉ. निधि रैना ने बताया कि गर्भाश्य से निकलने वाले पानी से दुर्गंध, खारिश या फिर शारीरिक संबंध बनाते समय अधिक दर्द हो तो वह इन्फेक्शन हो सकता है। इसमें महिला और उसके पार्टनर दोनों का इलाज होना जरूरी है। ऐसा न होने पर महिलाओं को बार-बार इन्फेक्शन होता है। महावारी के शुरुआत और अंत के दिनों में अनियमितताएं रहती हैं। यह घबराने की बात नहीं है। 20 से 35 दिन में दो से सात बार रक्त स्राव होना स्वस्थ शरीर के संकेत हैं। मासिक धर्म माह में दो बार हो या फिर फिर डेढ़ माह में एक बार, यदि इस पूरे समय में दो से सात दिन रक्त स्राव होता है, तो इसमें घबराने की कोई बात नहीं है। निधि ने यूरिन इन्फेक्शन और ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों और इसके उपचार के तरीके भी बताए।
बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. चित्रा कौशल ने बताया कि नवजात बच्चे को मां की छाती से लगाए रखना चाहिए। इससे जहां बच्चे को गर्माहट मिलती है। वहीं, मां में दूध की क्षमता भी बढ़ती है। बच्चे के कमरे को गर्म रखना चाहिए, जबकि बच्चे के अंग का कोई एक हिस्सा सामान्य से ज्यादा हिलना दौरे के लक्षण हैं। बच्चे की देखभाल करते समय चूड़ियां, अंगूठियां पहनने से और हाथ धोकर तोलिए से साफ करने का परहेज करने की सलाह डॉ. कौशल ने दी। ऐसा करने से बच्चे को इन्फेक्शन से बचाया जा सकता है। इस मौके पर नगर निगम धर्मशाला के शहरी आजीविका मिशन के समन्वयक संदीप भरमौरिया भी मौजूद रहे।
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महिलाओं के प्रश्नों का चिकित्सकों ने दिया उत्तर
सुमन के सवाल के जवाब में डॉ. निधि ने बताया कि मिस कैरिज एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। बच्चादानी में बच्चा ठीक से नहीं बनता और बढ़ता, तो वह मिस कैरिज हो जाता है। बच्चा प्लान करने से पहले ही फोलिक एसिड शुरू कर देनी चाहिए। निशा के सवाल के जवाब में एक बार मिस कैरिज होने के बाद कम से कम छह माह तक बच्चा प्लान नहीं करना चाहिए।
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कार्यक्रम में ये महिलाएं रहीं मौजूद
अनिता, अचला सूद, अनुलता, तृप्ता राणा, आरती, रेखा देवी, पूजा, वैशाली, निशा, भावना, रीना, मीना, सुनीता, कवि देवी, निखा देवी, शैलजा, संजना, झुमरी, अनु बाला, नीलम, रंजना, सोनिया, संगीता, राजिंद्र कौर, सुमन, सुरिंद्रा, सपना, रुपनी, रीता, नंदिना, राखी, सुमन बाला, अंजु बाला, सविता देवी, शालिनी, बिंता देवी, दीक्षा, निशा देवी, कविता कुमारी, आशा, कंचन, सीमा, विवेका, मंजू, सविता, सुमन देवी, कमलेश, रिंपी, ऊषा, कश्मीरो, दीपिका, पूजा, श्यामलता, रीना, शालू पुन, शूगरो, शिवानी, मंजू, संतोष और मंजू शर्मा आदि मौजूद रहीं।
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