अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। प्रदेश के निजी स्कूलों में शुरू हो रहे शैक्षणिक सत्र 2018-19 के लिए शिक्षा का अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों को प्रवेश मिलेगा। इसके तहत स्कूल प्रबंधन को पहली और छठी कक्षा में 25 फीसदी सीटें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, बीपीएल और आईआरडीपी श्रेणी के बच्चों के माध्यम से भरी जाएंगी। निजी स्कूलों में आरटीई के तहत ऐसे विद्यार्थियों को प्रवेश न देने वाले स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं स्कूल की संबद्धता भी रद्द हो सकती है।
आरटीई के तहत गरीब बच्चों की एडमिशन के लिए निर्धारित नियमों के तहत गरीब बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। इसके तहत पहली और छठी कक्षा में ही विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। पहली कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चों की आयु 31 मार्च तक पांच वर्ष पूरी होनी चाहिए, जबकि स्कूल से बच्चे के घर की दूरी डेढ़ किलो मीटर होनी चाहिए। वहीं, छठी कक्षा में प्रवेश के लिए स्कूल और घर की दूरी सीमा तीन किलो मीटर निर्धारित की गई है। उधर, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक कांगड़ा दीपक किनायत ने बताया कि आरटीई के तहत स्कूलों में गरीब बच्चों को दाखिला देना अनिवार्य है। ऐसा न करने वाले स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।