अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। जोनल अस्पताल धर्मशाला की रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) की बैठक दो साल बाद हुई। आरकेएस की बैठक की अध्यक्षता समिति के चेमरमैन एवं उपायुक्त संदीप कुमार ने की। इसम दौरान लगभग तीन करोड़ 56 लाख रुपये का वार्षिक बजट रखा गया। बैठक में रेडक्रॉस सोसायटी के पांच लैब तकनीशियन और सहायकों का मामला उछाला। इन पांचों कर्मचारियों पर रेडक्रॉस सोसायटी कई सालों से हर वर्ष 10 लाख रुपये वेतन के रूप में खर्च कर रही है, जबकि से कर्मचारी धर्मशाला अस्पताल की लैब में सेवाएं दे रहे हैं। इसकी रेडक्रास सोसायटी को एक रुपये आय नहीं होती है।
अस्पताल प्रबंधन भी इन कर्मचारियों पर सिर्फ साल में तीन लाख रुपये के आसपास खर्च करता है। इसके बावजूद रेडक्रॉस सोसायटी को हर साल लाखों रुपये का चूना लग रहा है। आरकेएस की बैठक में इन कर्मचारियों को रेगुलर पे स्केल देने की बात उठी, तो रेडक्रॉस सोसायटी ने इन कर्मचारियों को आरकेएस में लेने की बात कही। इस पर कोई सहमति नहीं बन पाई। आरकेएस के चेयरमैन ने पूरे मामले को अगली बैठक में रखने का सुझाव दिया। इसके अलावा रोगी कल्याण समिति के 39 कर्मचारियों को रेगुलर पे स्केल देने पर भी कोई सहमति नहीं बनी है। धर्मशाला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिनेश महाजन ने मई 2016 में हुई बैठक का ब्यौरा रखा। उस बैठक में जो काम प्रस्तावित किए गए थे। उनके बारे में पूरी जानकारी समिति के सदस्यों के समक्ष रखी। इस मौके पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एमएस राणा, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश गुलेरी, डॉ. अजय दत्ता सहित लोक निर्माण विभाग, रेडक्रॉस सोसायटी और विभिन्न विभागों के अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
वीआईपी रूम और पोस्टमार्टम फीस बढ़ेगी
जोनल अस्पताल धर्मशाला के वीआईपी रूम की फीस अब 600 रुपये के बजाय 1000 रुपये प्रतिदिन होगी। इसके लिए आरकेएस ने हामी भरी है। फीस बढ़ाने से पहले वीआईपी रूम में फ्रिज और एलईडी की सुविधा मुहैया करवाई जाएगी। इसके अलावा एक शव की पोस्टमार्टम फीस भी 75 रुपये से 100 रुपये करने का फैसला लिया गया।
चकाचक होगा अस्पताल भवन
आरकेएस की बैठक में अस्पताल भवन की बाहरी रिपेयर करने, पुरानी लिफ्ट को बदलने, वेबसाइट अपडेट करने, परिसर की लाइट्स ठीक करने, ऑपरेशन थिएटर से बाहर निकलने के लिए एक और दरवाजा बनाने, कैंटीन के दोबारा टेंडर करने, दिव्यांगों के लिए अलग शौचालय का निर्माण करने, लैब की टाइमिंग को लेकर भी चर्चा हुई। हालांकि अभी लैब की समयसारणी में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
इनसेट
बैठक में साफ झलकी डॉक्टरों की कमी
आरकेएस की बैठक में जब एसएमएस ने वार्षिक आंकड़े पेश किए, तो उसमें अस्पताल में चिकित्सकों की कमी साफ झलकी। एक अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 तक धर्मशाला अस्पताल में 1455 गर्भवती महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया, लेकिन एक अप्रैल 2017 से 31 जनवरी 2018 तक यह संख्या सिर्फ 820 रही। वर्ष 2015-16 में यह संख्या 1712 थी। इस वर्ष अधिकतर समय सिर्फ एक गायनी विशेषज्ञ अस्पताल में तैनात रहे। बता दें कि धर्मशाला अस्पताल में डाक्टरों के 37 पद सृजित हैं, जिसमें से 16 पद रिक्त चल रहे हैं। इसके अलावा इंडोर मरीजों और आउट डोर मरीजों की संख्या में कमी आई है।