डरोह(कांगड़ा)। बदलते मौसम के साथ युवा वर्ग का फैशन भी बदलने लगता है। फैशन के इस दौर में युवा अपने आप को किसी न किसी तरह से अलग दिखाने की होड़ में नजर आ रहे हैं।
युवाओं ने इन दिनों हेयर कटिंग के नए-नए स्टाइल बनाने शुरू कर दिए हैं।
फैशन के इस दौर में देशी ब्वॉयज भी पीछे नहीं हैं। देशी ब्वॉयज में इन दिनों मुर्गा कटिंग का क्रेज छाया हुआ है। कॉलेजों में पढ़ने वाले युवाओं को देख इनसे स्कूली छात्र भी इस फैशन को अपनाने लगे हैं। वहीं, स्कूलों में पढ़ने वाले जमा एक और दो के छात्र भी इससे अछूते नहीं रहे हैं। इससे जहां स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बिगड़ रहा है, वहीं स्कूलों में अनुशासन की भी धज्जियां उड़ रही हैं। इससे स्कूली अध्यापकों का सिरदर्द और बढ़ गया है। चाइल्ड हेल्पलाइन और छात्रों को न मारना और उनसे सौहार्दपूर्ण व्यवहार करने जैसे नियमों ने अध्यापकों के जहां हाथ बांध दिए हैं, वहीं इसी बात का फायदा उठाकर ऐसे बिगड़ैल छात्र स्कूलों का माहौल खराब कर रहे हैं।
फैशन का खुमार इन दिनों युवा वर्ग पर इस कदर हावी है कि वे स्कूलों में मिलने वाली मुफ्त वर्दी को भी अपने ही तरीके से सिलवा रहे हैं। वर्दी की पैंट को भी अब फैशन का ग्रहण लग गया है। वर्दी की पैंट भी अब नैरो फिटिंग में सिलाई जा रही है।
हेयर ड्रेसर विपिन कुमार, काका हेयर शैलून के मालिक काका, केहर सिंह, मदन कुमार, विक्की, राजू, प्यारे लाल आदि ने बताया कि अब वे जमाना गया कि उन्हें किसी के बाल काटने होते थे तो वे बिना पूछे ही बाल काट देते थे। अब युवा कुर्सी पर बैठते ही पहले वे बात कहते हैं कि उन्हें अपनी पसंद की कटिंग करवानी है। उसके बदले में बाल काटने वाला चाहे कितने भी पैसे ले ले। ऐसे में अब उन शैलून में ही ज्यादा भीड़ हो रही है, जहां बाल काटने वाले युवा हैं। इससे पुराने जमाने के बाल काटने वालों का धंधा अधेड़ और उमरदराज लोगों तक ही सीमित रह गया है। हेयर ड्रेसर शम्मी, केहर सिंह और काका हेयर ड्रेसर के मालिक काका ने बताया कि उनके पास रोजाना 40 से 50 युवा मुर्गा कटिंग करवाने आते हैं। युवाओं की भीड़ रोजाना उनकी दुकानों में लगी ही रहती है।
युवाओं हैप्पी, गौरव, पिंकी, जतिन, कवि राज, प्रिंस राणा, रितेश, पंकज, पवन, रोहित, विकास, रिस्व राणा, दिपेश, पंकेश, रिकी राणा, विवेक आदि का कहना है कि नए जमाने के साथ चलना है तो फैशन तो करना ही होगा। बालों की कटिंग उनकी लुक को बढ़ाता है।