अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर (कांगड़ा)। सभी पंचायतों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाने वाला विकास खंड फतेहपुर खुद को यानी जहां ब्लॉक कार्यालय है, फतेहपुर पंचायत को ही संपूर्ण स्वच्छ नहीं कर पा रहा है तो पूरे विकास खंड में स्वच्छता की स्थिति की कल्पना की जा सकती है।
करीब दस साल पहले फतेहपुर पंचायत की तत्कालीन पंचायत ने लाखों रुपये खर्च कर महज 500 मीटर के दायरे में एक स्नानागार और दो सार्वजनिक शौचालय बनवाए थे। इनमें से स्नानागार एसडीएम ऑफिस और सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के पास, जबकि दो शौचालयों में से एक फतेहपुर पंचायत घर के पास और दूसरा विकास खंड कार्यालय के पास बना है। उस समय इससे लोगों को दोहरा फायदा मिलने लगा था। स्थानीय लोगों को खुले में शौच जाने से निजात मिलने के साथ-साथ फतेहपुर में स्थित करीब तीन दर्जन सरकारी कार्यालयों में काम करवाने आने वाले लोगों को भी बेहतर सुविधा मिल रही थी।
मगर जैसे-जैसे पूरे भारत में शौचालय बनाकर स्वच्छता का अभियान जोर पकड़ने लगा, फतेहपुर में इसके विपरीत शौचालय के बजाय खुले में शौच की नकारात्मक प्रवृति फिर से हावी होने लगी है। अब ये सभी शौचालय सफेद हाथी मात्र बनकर रह गए हैं। मरम्मत न होने और पानी का प्रबंध न होने से स्नानागार और शौचालय बंद और टूटी-फूटी अवस्था में हैं। ऐसे में दूरदराज से फतेहपुर काम करवाने आने वाले लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। इसे महज रस्म अदायगी ही कहा जा सकता है कि आए दिन विभिन्न सरकारी विभाग स्वच्छता और शौचालयों के महत्व को रैलियों और नारों के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं। स्थानीय निवासी पंकज, राजकुमार, मुकेश ने कहा कि फतेहपुर की विभिन्न पंचायतों के सैकड़ों लोग हर रोज फतेहपुर काम करवाने आते हैं। अगर विभाग यहां शौचालय की सुविधा दे तो सभी पंचायतों में अपने आप स्वच्छता का संदेश चला जाएगा। उधर, इस बारे विकास खंड अधिकारी फतेहपुर सुषमा धीमान ने कहा कि शीघ्र ही इनकी मरम्मत करवाई जाएगी।