फतेहपुर (कांगड़ा)। पौंग बांध किनारे बीबीएमबी की खाली पड़ी भूमि पर खेती पर रोक लगाने पर वन्य प्राणी विभाग की कार्रवाई पर विस्थापित उग्र होने लगे हैं। वीरवार को जगनोली क्षेत्र के विस्थापितों सहित धर्म सिंह वैद्य, रणबीर सिंह, हरदेव सिंह, चैन सिंह, कर्ण सिंह, सूरम सिंह, रविंद्र, विक्कू ने कहा कि जब तक प्रदेेश सरकार 1962 के समझौते अनुसार वायदों को पूरा नहीं करती, तब तक वह बीबीएमबी की खाली पड़ी जमीन पर खेती करते रहेंगे। इसके बदले चाहे वन्य प्राणी विभाग उनके खिलाफ केस ही क्यों न कर दें।
उन्होंने बताया कि जब पौंग डैम का निर्माण हुआ था तब हजारों किसानों की उपजाऊ भूमि उसमें समा गई थी। इसके बदले में सरकार ने राजस्थान के श्री गंगानगर जिले में भूमि देने का वायदा किया था, लेकिन 45 वर्ष बीत जाने के उपरांत भी विस्थापितों का पुनर्वास नहीं हो पाया है। अब जैसलमेर, रामगढ़, मोहनगढ़ व नाचना की बंजर भूमि विस्थापितों को दी जा रही है। जहां न स्कूल, न पानी और न ही सड़क की सुविधा है। उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ देश के प्रधानमंत्री यह कह रहे हैं कि जहां-जहां भी बांधों के समीप उपजाऊ भूमि खाली पड़ी है उस पर काश्त की जाए, ताकि देश में अन्न की कोई कमी न रह पाए। तो वहीं दूसरी तरफ वन्य प्राणी विभाग खेती कर अन्न उगाकर देश के विकास में योगदान देने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें हतोत्साहित करने पर तुला हुआ है। उन्होंने विभाग को चेताया कि वह मर जाएंगे, लेकिन जब तक उनका सही तरीके से पुनर्वास नहीं किया जाता, तब तक खेती करते रहेंगे।