बैजनाथ (कांगड़ा)। बैजनाथ-पपरोला नगर पंचायत क्षेत्र में कूड़े कर्कट को ठिकाने लगाने के लिए डंपिंग साइट का चयन नपं के प्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। नपं के गठन के दो वर्ष बाद भी डंपिंग साइट न मिलने के कारण कूड़े को या तो कूहलों में फेंका जा रहा है या फिर बिनवा खड्ड के समीप एनएच के किनारे जलाया जा रहा है। डंपिंग साइट के लिए करीब आधा दर्जन स्थानों का चयन किया गया जा चुका है, लेकिन संबंधित समीपवर्ती पंचायतों से एनओसी न मिलना डंपिंग साइट की राह में रोड़ा बना हुआ है। यहां तक कि नपं इसके लिए भूमि खरीदने पर भी विचार कर रही है, लेकिन जमीन मिलने के बावजूद एनओसी की समस्या सामने आ रही है। वहीं, धार बग्गी में वन विभाग की भूमि होने के कारण अनुमति नहीं मिल सकी है। बैजनाथ-पपरोला बाजारों और 11 वार्डों की गलियों की गंदगी को ठिकाने लगाने का हल जल्द न मिलने की सूरत में यह समस्या भविष्य में और अधिक विकराल होगी। एक अनुमान के अनुसार बैजनाथ और पपरोला बाजारों से ही रोजाना कूड़े-कर्कट के आधा दर्जन ट्रैक्टर निकलते हैं। वहीं सड़क के किनारे गंदगी जलाने के कारण आसपास का वातावरण दूषित हो रहा है और बीमारियों को न्योता दे रहा है। दूसरी तरफ कूहलों में फेंका जा रहा कूड़ा पानी को दूषित कर रहा है और लोग इस पानी का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इस संबंध में नपं के उपाध्यक्ष छवि शर्मा का कहना है कि नपं अपने तौर पर डंपिंग साइट की तलाश में जुटी हुई है, लेकिन एनओसी और लोगों के विरोध को देखते हुए अब तक डंपिंग साइट का स्थान चयनित नहीं किया जा सका है । वहीं, एसडीएम डॉ. मुरारी ने बताया कि नपं के अधिकारियों को जल्द इसका हल करने के निर्देश दिए गए हैं ।
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पंचायत प्रतिनिधि बोले,पहले कूड़ा निस्तारण का प्रबंध हो
समीपवर्ती पंचायतों के प्रतिनिधियों का कहना है कि नपं डंपिग साइट का चयन करने के बाद सबसे पहले उस साइट पर कूड़े के निस्तारण को लेकर उचित प्रबंध करती है तो ऐसी स्थिति में नंगर पंचायत को एनओसी दी जा सकती है ।