राजकुमार सूद
बैजनाथ (कांगड़ा)। ऐतिहासिक शिव मंदिर में मकर संक्रांति के पर्व पर शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले घृतमंडल को लेकर मंदिर न्यास ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार गाय के दूध से बने शुद्ध चार क्विंटल देसी घी और सूखे मेवों से घृतमंडल तैयार किया जाएगा। 14 जनवरी को देर शाम को होने वाली रोजाना आरती के बाद शिवलिंग पर देसी घी और सूखे मेवों से घृतमंडल चढ़ाए जाने का कार्य शुरु होगा, जो देर रात 11 बजे तक जारी रहेगा। देसी घी को पिघलाने का कार्य 10 जनवरी के बाद शुरू होगा। इस घी को ठंडे पानी से धोकर पेड़ों के रूप में तैयार किया जाएगा। सात दिन तक पवित्र शिवलिंग इसी रूप में नजर आएंगे और सातवें दिन इस घी को श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित कर दिया जाएगा। प्रसाद रूपी इस घी को खाने के बजाय चर्म रोगों के निवारण के लिए प्रयोग में लाया जाता है। चिकित्सकों की मानें तो ठंडे पानी से धोने और शिवलिंग पर चढ़े रहने के कारण यह घी औषधि का रूप धारण कर लेता है। चर्म रोगों के निवारण के लिए यह काफी लाभदायक रहता है। शिव मंदिर के अतिरिक्त महाकाल और मुकटेश्वर नाथ मंदिरों में भी घृतमंडल चढ़ाया जाता है। 14 जनवरी रात के अगले दिन मंदिर में तारा रात्रि महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। तारारात्रि को भजन-कीर्तन के बाद सुबह मंगलवार को मंदिर के समीप भंडारा लगाया जाएगा। उधर, महाकाल मंदिर के पुजारी राम कुमार शर्मा ने बताया कि तारारात्रि के दिन भगवान शिव का रिश्ता मां पार्वती के साथ पक्का हुआ था। तारारात्रि के दिन ही भगवान शिव और मां पार्वती की सगाई हुई थी। तारारात्रि के ठीक एक माह के बाद मां पार्वती और भगवान शिव शादी के पवित्र बंधन में बंध गए थे। इस दिन ही शिवरात्रि मनाई जाती है।