फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कुल्थी के विकास को तकनीकें विकसित

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

पालमपुर (कांगड़ा)। कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में जीनोम अनुक्रम के माध्यम से कुल्थी के विकास के लिए महत्वपूर्ण तकनीकें विकसित की गई हैं। कुल्थी की विशेष प्रजाति एचपीके-4 (बैजु) में जीनोम अनुक्रम जारी करते हुए कुलपति प्रो. अशोक कुमार सरयाल ने कहा कि विश्वविद्यालय की यह एक विशेष शोध रिपोर्ट है, जिसमें वैज्ञानिकों की टीम ने किसी फसल के जीनोम अनुक्रम की संपूर्ण शृंखला तैयार कर ली है। उन्होंने कहा कि इस शोध कार्यक्रम के लिए दो वर्ष पूर्व भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग तथा जापानी विज्ञान प्रोत्साहन सोसायटी की ओर से धन उपलब्ध करवाया गया था। कुलपति ने डॉ. राकेश कुमार चाहोता, कृषि जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोफेसर डॉ. टीआर शर्मा और चीबा जापान स्थित कजुसा पौध जीनोम प्रयोगशाला के अध्यक्ष डॉ. सचिको ईसोब की कड़ी मेहनत की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि फसल के जीनोम अनुक्रम के बारे में इससे पहले जानकारियां उपलब्ध नहीं थीं। शोध निदेशक डॉ. आरएस जंवाल तथा विभागाध्यक्ष डॉ. एचके चौधरी ने इस शोध के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि कुल्थी मूल रूप से उत्तर-पश्चिमी हिमालय क्षेत्र की स्वदेशी फलियों की प्रजाति है जो भरपूर पोषक तत्वों तथा औषधीय गुणों से भी परिपूर्ण है। यह फसल वर्षा आधारित और सीमांत कृषि के लिए अत्यंत उपयुक्त है और शुष्क भूमि में जोखिम को पूर्ण करने की क्षमता रखती है। इसका एडिमा, बवासीर और गुर्दे की पथरी के इलाज में भी उपयोग होता है। डा. राकेश चाहोता ने इस फसल पर शोध अध्ययन तथा कुल्थी के वाणिज्य संभावनाओं व प्रयोग पर बल दिया। जापान से मुख्य शोध अन्वेषक डॉ. सचिको ने इस फलीदार फसल के जीनोम अनुक्रम के के बारे में कहा कि इस फसल प्रजाति के 36,000 जीनों की पहचान की जा चुकी है जिससे भविष्य के प्रजन कार्यक्रमों के लिए लाभ उठाया जा सकता है। इस मौके पर विवि के वैज्ञानिक तथा स्नातकोत्तर छात्र मौजूद रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें