स्नातक की पढ़ाई से महंगी निजी स्कूल में प्री नर्सरी
प्री नर्सरी करने का खर्चा 30 से 40 हजार, 12 हजार में हो रही स्नातकोत्तर
हर कक्षा में ली जा रही अलग फीस
हर साल करवानी पड़ रही एडमिशन
राकेश भारद्वाज
धर्मशाला। विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई से महंगी अभिभावकों को बच्चों को प्री-नर्सरी और प्राइमरी एजुकेशन पड़ रही है। केंद्रीय विश्वविद्यालय सहित अन्य सरकारी विश्वविद्यालयों में करीब 12 हजार रुपये में कला स्नातक की पढ़ाई की फीस है, जबकि निजी स्कूलों में प्री-नर्सरी का खर्चा ही 30 से 40 हजार रुपये बैठ रहा है। इतना ही नहीं, प्राइमरी स्तर की पढ़ाई के लिए भी अभिभावकों को खासी रकम चुकानी पड़ रही है, जो 40 से 50 हजार रुपये तक पहुंच रही है। सरकार पूरा साल भर निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण करने के लिए दावे करती है लेकिन प्रदेश में अभी भी निजी स्कूलों की फीस को लेकर कोई मापदंड सुनिश्चित नहीं किए गए हैं। इससे अभिभावकों को भारी-भरकम फीस चुकानी पड़ रही है।
प्री-नर्सरी का फीस स्ट्रक्चर
जिले भर में विभिन्न कंपनियों की फ्रेंचाइजी लेकर एकाएक खुले प्ले स्कूलों में बच्चों को प्री-नर्सरी करवाई जा रही है। इसमें एडमिशन के लिए 10 से 15 हजार रुपये तक फीस ली जा रही है, जबकि मासिक फीस अलग से ली जा रही है। एडमिशन और मासिक फीस मिलाकर कुल 30 से 40 हजार रुपये तक पहुंच रही है।
प्राइमरी का फीस स्ट्रक्चर
निजी स्कूलों में हर साल बच्चों की एडमिशन नए सिरे से की जा रही है। इसकी एवज में अभिभावकों से एडमिशन फीस, किताबों का खर्च, वर्दी सहित अन्य खर्चों को मिलाकर 20 से 25 हजार रुपये लिया जा रहा है, जबकि 1500 रुपये से 2500 रुपये तक मासिक ट्यूशन फीस रखी गई है।
कार्यक्रम आयोजन के अलग वसूले जाते हैं पैसे
निजी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई करवा रहे अभिभावकों की मानें तो स्कूल प्रबंधन एडमिशन फीस, मासिक फीस सहित अन्य फंड लेता है। वहीं, साल भर विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजनों को लेकर भी पैसे वसूले जा रहे हैं।
निजी स्कूलों की फीस शिक्षा विभाग तय नहीं करता है। निजी स्कूलों की फीस नियंत्रण को लेकर विभाग से हमें कोई भी आदेश अभी तक नहीं मिले हैं।
- केके शर्मा, कार्यकारी उप शिक्षा निदेशक उच्च कांगड़ा