अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। सीएडंवी अध्यापक संघ ने शिक्षा विभाग पर डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंटरी एजूकेशन) कोर्स करवाने के लिए आरएडंपी रूल्स की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। संघ का मानना है कि शास्त्री और भाषा अध्यापकों से बीएड करवाई जानी चाहिए।
संघ के प्रदेशाध्यक्ष चमन लाल शर्मा ने बताया कि शिक्षा विभाग ने 22 सितंबर 2017 को जारी डीएलएड की अधिसूचना को निरस्त किया, जबकि इसके बाद 31 अक्तूबर को अधिसूचना जारी कर 23 अगस्त 2010 के बाद नियुक्त शास्त्री और भाषा अध्यापकों को फिर डीएलएड करने के आदेश दिए गए, इसका संघ विरोध करता है। भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में 14/07/2011 में जो संशोधन हुआ है। उसके अनुसार शास्त्री के लिए राज्य सरकार के मान्यता प्राप्त किसी विश्वविद्यालय या संस्थान से न्यूनतम 50 फीसदी अंकों के साथ शास्त्री होनी चाहिए। वहीं, भाषा अध्यापकों को हिंदी में 50 फीसदी अंकों के साथ कला स्नातक या 50 फीसदी अंकों के साथ प्रभाकर( हिंदी में ऑनर्स) अंग्रेजी विषय सहित या 50 फीसदी अंकों के साथ हिंदी विषय में एमए की हो। उसमें बीएड और डीएलएड का कोई भी हवाला नहीं है। संघ ने कहा है कि 2017 से पहले सभी सीएडंवी शिक्षकों को डीएलएड के लिए बाध्य न किया जाए। साल 2018 में आरएडंपी नियमों में संशोधन कर इसे शामिल करने के पश्चात लागू किया जाए। संघ के महासचिव राकेश संदल, कोषाध्यक्ष एचएस मस्ताना, संघर्ष समिति के अध्यक्ष चत्तर सिंह सुर्यवंशी, प्रेस सचिव मंगल सिंह, हमीरपुर से सुरेंद्र, ऊना से रमन, बिलासपुर से कश्मीर, कुल्लू से गोविंद, शिमला से नरेंद्र, मंडी से प्रहलाद, सोलन से कमल, सिरमौर से धनवीर और महिला मोर्चा अध्यक्ष रक्षा राठौर ने विभाग से कहा कि वे भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार ही शिक्षकों से कोई कोर्स करवाएं।