फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jairam Thakur: नेता प्रतिपक्ष जयराम बोले- सरकार चलाने के बजाय धर्मार्थ कार्यों में ही खर्च हो मंदिरों का पैसा

Thu, 16 Oct 2025 07:28 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

Jairam Thakur: नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा ने हमेशा मंदिर के पैसे जबरदस्ती लेकर सरकार चलाने का विरोध किया। अब उच्च न्यायालय द्वारा मंदिर के पैसे सरकार चलाने के लिए खर्च करने पर रोक लगाने और देखरेख से संबंधित जो दिशा निर्देश दिए गए हैं, वह स्वागत योग्य हैं।
विज्ञापन
जयराम ठाकुर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मंदिरों की धनराशि पर सरकार की नजर पहले से ही टेढ़ी थी। सरकार मंदिरों का पैसा हथियाने की हमेशा तरकीबें निकालता रहती थी। कभी किसी योजना के नाम पर, कभी किसी और बहाने से सरकार मंदिरों का पैसा हथियाने का काम कर रही थी। सनातन को लेकर भी सरकार की सोच जगजाहिर हो चुकी है। भाजपा ने हमेशा मंदिर के पैसे जबरदस्ती लेकर सरकार चलाने का विरोध किया। समय-समय पर सरकार की नीयत को लेकर आगाह भी किया था। अब उच्च न्यायालय द्वारा मंदिर के पैसे सरकार चलाने के लिए खर्च करने पर रोक लगाने और देखरेख से संबंधित जो दिशा निर्देश दिए गए हैं, वह स्वागत योग्य हैं।

विज्ञापन


वीरवार को जारी बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि हमने पहले ही इस मामले में सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे कि वह सरकार चलाने के लिए मंदिरों की संपित्त हड़पना चाहती है। इसी वर्ष 29 जनवरी को सरकार द्वारा प्रदेश के सभी उपायुक्तों को पत्र लिखा गया था कि मंदिर अपने राजस्व से सरकार के खजाने में पैसा जमा करें उन पैसों का इस्तेमाल सुखाश्रय और सुख शिक्षा योजना के लिए होगा।

विज्ञापन

उन्होंने कहा कि यह सरकार की एक साजिश से ज्यादा कुछ नहीं थी। लोक कल्याण समिति की बैठक में यह सामने आया कि सरकार द्वारा सुखाश्रय के लिए आवंटित बजट का लगभग 88 करोड़ रुपये एफडी किया गया है। जबकि लाभार्थियों को कोई बड़ी राहत सहायता मिल नहीं रही है। इस योजना के नाम पर जो कि सरकार की फ्लैगशिप स्कीम है जिसके लिए सरकार द्वारा कम से कम करोड़ों रुपये हर साल विज्ञापन पर खर्च किए गए उस योजना के लिए भी मंदिर से पैसा क्यों लिया जा रहा है। जयराम ठाकुर ने कहा कि मंदिरों का चढ़ावा अब सिर्फ धार्मिक, शैक्षणिक और धर्मार्थ कार्यों में खर्च होगा। मंदिरों का पैसा श्रद्धालुओं की सुविधा, गौ माता की सेवा और सनातन धर्म के प्रचार प्रसार में ही लगेगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें