अवैध कब्जे स्वीकारने वाले 1.60 लाख लोग और उनके परिजन पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। 2003 में अवैध कब्जों को नियमित करने के लिए इन परिवारों ने सरकार को स्वघोषणा के साथ खुद अपने दस्तावेज दिए थे। इन लोगों की मिसलें काटी गई हैं। राज्य सरकार और चुनाव आयोग ऐसे मामलों को गंभीरता से लेगा। 29 दिसंबर 2020 में राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से भी पत्र जारी हुआ है। जब प्रत्याशी किसी भी पद के लिए नामांकन पर्चा भरेगा, चुनाव अधिकारी की ओर से उन्हें स्वयं सत्यापित फार्म दिया जाएगा। इसमें चिट्टे में संलिप्त, सहकारी बैंक से डिफाल्टर, लंबित ऑडिट रिकावरी और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा न होने से संबंधित पांच कॉलम दिए होंगे। फार्म को स्वयं सत्यापित करने के बाद अगर इनमें से किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है तो कड़ी कार्रवाई होगी। प्रधान बनने के बाद भी जनप्रतिनिधियों को कुर्सी से हाथ धोना पड़ेगा।
हिमाचल प्रदेश में सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाले चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। उम्मीदवार जब किसी भी पद के लिए फार्म भरेंगे। उस समय उन्हें स्वयं सत्यापन फार्म दिया जाएगा। अगर किसी ने कब्जा किया होगा तो राजस्व विभाग से इसकी जांच कराई जाएगी।- अनिल खाची, राज्य निर्वाचन आयोग
सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की गाइड लाइंस के अनुसार ही चुनाव औपचारिकताएं पूरी करने में अमलीजामा पहनाया जा रहा है। अवैध कब्जा करने वाले चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।- अमरजीत सिंह, पंचायत सचिव, पंचायतीराज विभाग