तकनीक में ड्रोन का होगा इस्तेमाल
इस तकनीक में ड्रोन करीब तीन मीटर की ऊंचाई पर रहकर आसपास के वातावरण को देखता है। वह जमीन पर चल रहे क्वाड्रुपेड रोबोट के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार करता है और उसे आगे बढ़ने के निर्देश भेजता है। खास बात यह है कि रोबोट अपने आसपास की बाधाओं को पहचानने के लिए कैमरे जैसे बाहरी सेंसरों पर निर्भर नहीं है। उसे यह जानकारी ड्रोन से मिलती है। इस तकनीक का भविष्य में खदानों, बिजलीघरों, तेल रिफाइनरियों, निर्माण स्थलों और अन्य जोखिमपूर्ण औद्योगिक परिसरों में निरीक्षण के लिए इस्तेमाल हो सकता है। ऐसे स्थानों पर रोबोट की मदद से उन हिस्सों की जांच की जा सकेगी, जहां कर्मचारियों का पहुंचना खतरनाक हो सकता है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भी ऐसी तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है, लेकिन इसके लिए अलग से परीक्षण और तकनीकी सुधार जरूरी होंगे।
समतल जमीन, पत्थर, रेत और सीढ़ियों जैसे भूभाग में हुआ परीक्षण
शोधकर्ताओं ने 6.73 मीटर गुना 6.28 मीटर के प्रयोगशाला क्षेत्र में इसका परीक्षण किया। इसमें समतल जमीन, पत्थर, रेत और सीढ़ियों जैसे भूभाग शामिल थे। एक परीक्षण में रोबोट ने 4.5 मीटर का रास्ता 50 सेकंड में तय किया। हालांकि अभी वास्तविक खदानों, सुरंगों, औद्योगिक संयंत्रों या भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में इसका परीक्षण नहीं हुआ है। तकनीक की कुछ सीमाएं भी हैं। इसलिए इसे वास्तविक परिस्थितियों में इस्तेमाल करने से पहले और परीक्षण करने होंगे। शोध 19 जनवरी 2026 को आईईईई एक्सेस में प्रकाशित हुआ। जुलाई 2024 से जनवरी 2026 तक चले इस शोध में दर्शनकुमार प्रजापति, अंकित मेहरा, पुष्कर कुमार, आशीष राणा, एसके सूर्य प्रकाश और अमित शुक्ला शामिल रहे।
चलते इंसान को देखकर भी बदल लेता है रास्ता
शोधकर्ताओं ने इसके लिए मोबाइल प्रोब पोटेंशियल फील्ड (एमपीपीएफ) तकनीक विकसित की है। यह लक्ष्य तक पहुंचने के साथ रास्ते में आने वाली बाधाओं से बचने का काम करती है। इसमें बाधा के आकार के अलावा उसकी गति और दिशा को भी ध्यान में रखा जाता है। प्रयोग के दौरान रोबोट ने चलते इंसान से बचते हुए कम से कम 20 सेंटीमीटर की दूरी बनाए रखी। नया रास्ता तैयार करने में इसे महज 0.025 सेकंड लगे। ड्रोन और रोबोट के बीच निर्देशों का संचार 30 हर्ट्ज की दर से होता है, जिससे बदलती परिस्थितियों में रास्ते की लगातार गणना संभव होती है।
हमारा उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जो रोबोट को अलग-अलग भूभागों पर बाधाओं से बचते हुए सुरक्षित रास्ता तय करने में मदद करे। एमपीपीएफ तकनीक गतिशील बाधाओं को ध्यान में रखकर बहुत कम समय में रास्ते की दोबारा गणना करती है। भविष्य में इसे और बेहतर बनाने के लिए कई स्तरों पर काम करने की संभावनाएं हैं।-डॉ. अमित शुक्ला, सहायक प्रोफेसर, आईआईटी मंडी