गर्मियों में पानी कम होते ही पिछले कई वर्षों से उत्तराखंड के राजाजी पार्क से हाथियों का झुंड हिमाचल का रुख करता आ रहा है। मैदानी क्षेत्र में गन्ने की मिठास हाथियों को अपनी तरफ आकर्षित करती रही है। कुछ माह ठहरने के बाद वापस उत्तराखंड लौट जाते हैं। अब 2023 से करीब एक दर्जन हाथियों के झुंड ने नेशनल पार्क व आसपास वन क्षेत्र में डेरा जमाया है। पिछले तीन वर्षों के भीतर हाथी-मानव संघर्ष बढ़ गया है। कोलर से पांवटा तक एक महिला समेत दो लोगों को हाथियों के हमले से अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। हाथियों के भारी नुकसान के चलते बहराल, बातामंडी समेत आधा दर्जन गांव गन्ने की फसल उगाना ही छोड़ चुके हैं।


वन विभाग ने उत्तराखंड से हाथियों की आवाजाही पर नजर रखने को राज्य सीमा पर पांवटा साहिब के बहराल क्षेत्र में वॉच टावर स्थापित कर दिए हैं। वॉच टावर से गर्मियों के महीनों में जंगल की आग पर नजर रख सकेंगे। करीब 30 गज मित्रों की तैनाती कर दी है, जो वन कर्मियों के साथ हाथियों के कोरिडोर बन चुके उत्तराखंड सीमा के बहराल, बातामंडी से माजरा, गिरिनगर व नाहन के जंगलकोट तक तैनात रहेंगे। इनको सुरक्षा किट भी वितरित की है, जिसमें साउंड गन, एलईडी टार्च, जूते समेत शामिल हैं।
डीएफओ पांवटा साहिब ऐश्वर्य राज ने पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की सीमा पर बहराल में वॉच टॉवर स्थापित कर दिया गया है जिससे उत्तराखंड से आने वाले हाथियों की मूवमेंट पर नजर रखी जा सकेगी। मानव-हाथी संघर्ष कम करने को हर प्रोजेक्ट एलिफेंट के तहत कई कदम उठाए जा रहे हैं।