देश की आजादी को लेकर राष्ट्रीय नेताओं की ओर से दिए गए बलिदान को लेकर वीरवार को सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक हुई। बजट पर चर्चा के दौरान विधायक संजय रतन ने कहा कि विपक्ष के नेता हमारे राष्ट्रीय नेताओं के नामों का उल्लेख कर रहे हैं, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने देश के लिए कुर्बानी दी। वे ये भी बताएं कि उनके किन नेताओं ने देश के लिए कुर्बानी दी है। हमारे राष्ट्र नेता अमर हैं, जब तक सूरज चंद रहेगा, तब तक उनका नाम रहेगा।
इस पर भाजपा के वरिष्ठ विधायक विपिन सिंह परमार ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि कांग्रेस अपने नेताओं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम से योजनाओं की घोषणा तो कर देती है लेकिन उन्हें सही तरीके से लागू नहीं करती। ऐसे में उनका मान-सम्मान भाषणों और किताबों तक न रह जाए, इसके लिए उन्होंने उनके नाम का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि देश के लिए लाखों लोगों ने कुर्बानी दी है। क्या सरकार सुभाष चंद्र बोस को भूल गई। उन्हें किताबों में ढका गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में विशाल प्रतिमा बनाने और उनकी मौत का रहस्य पता करने के लिए दस्तावेजों को निकलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर, श्यामाप्रसाद मुखर्जी के नाम का भी उल्लेख किया।
इस पर संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि सभी राष्ट्र नेता सम्माननीय हैं। जब भी स्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी मनाली आते थे तो प्रदेश को 1000-1000 करोड़ देते थे। कांग्रेस विधायक दल सदन में उनका समर्थन करता था। उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने अपनी किताब माई कंट्री माई लाइफ में लिखा है कि आरएसएस का देश की आजादी में कोई योगदान नहीं है। उनका काम सिर्फ हिन्दू विचारधारा का प्रचार प्रसार करना था।