देश के कई प्रदेशों की तरह हिमाचल प्रदेश में भी राइट टू एजुकेशन अधिनियम-2009 के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को परीक्षा में फेल नहीं किया जाता था। पढ़ाई में कमजोर बच्चों को अगली कक्षा में दाखिल कर दिया जाता था। इस व्यवस्था के चलते नवीं में फेल होने वाले बच्चों की संख्या बढ़ जाती थी। इसके अलावा आठवीं तक पास और फेल की व्यवस्था न होने से उच्च शिक्षा प्राप्त करने में कई छात्र पिछड़ रहे थे। इसी कमी को दूर करने के लिए प्रदेश में इस नीति को लागू किया गया है। 2024 में इस पॉलिसी में बदलाव किया। स्कूलों में पांचवीं और आठवीं में अंग्रेजी, गणित और विज्ञान में ई ग्रेड वाले विद्यार्थियों को दो माह के भीतर विशेष परीक्षा लेने की बात की गई। इसके लिए इन विद्यार्थियों की विशेष कक्षाएं होंगी। उन्हें दो माह बाद होने वाली परीक्षा के लिए तैयार किया जाएगा, ताकि वे ई-ग्रेड से बाहर निकल आएं।
80 से 100 के बीच नंबर प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को ए ग्रेड दिया गया। 65 से 79 तक बी, 50 से 64 तक सी और 35 से 49 तक डी ग्रेड और 1 से 34 के बीच अंक प्राप्त करने वाले को ई ग्रेड दिया है।
इस बार नो डिटेंशन पॉलिसी को खत्म कर 5वीं और 8वीं के परिणाम को तैयार किया है। ई ग्रेड प्राप्त करने वाले इन विद्यार्थियों की दो माह बाद विशेष परीक्षा आयोजित होगी- अजय संबयाल, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा कांगड़ा