इसके अलावा, प्रोफेसर गर्ग एक प्रसिद्ध लेखक भी थे, जिन्होंने हिमाचल प्रदेश की संगीत, वाद्य यंत्रों और कला संस्कृति पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं। उनकी पुस्तकें और डॉक्यूमेंटरी देशभर में सराही गईं, और भारत सरकार से उन्हें मान्यता प्राप्त हुई। उनके द्वारा निर्मित कई डॉक्यूमेंटरी में हिमाचल की सांस्कृतिक धरोहर को बेहद प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया, जो आज भी सहेजी जाती हैं।
प्रोफेसर गर्ग राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय के स्तर पर भी कई सांस्कृतिक समितियों और प्रख्यात संस्थानित सम्मेलनों जैसे कि यूनेस्को आदि के सदस्य रहे। उन्होंने सांस्कृतिक नीतियों और पहचानों को संरक्षित करने के लिए हमेशा अपनी राय दी। उनके योगदान केवल कला और संगीत तक सीमित नहीं थे, बल्कि वह हिमाचल की लोक परंपराओं के संरक्षक भी थे।
प्रोफेसर नंद लाल गर्ग का निधन हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। हालांकि उनका योगदान हमेशा जीवित रहेगा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
सीएम ने जताया शोक
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रो. गर्ग का पूरा जीवन कला और संगीत की सेवा में समर्पित रहा। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में बतौर संगीत प्रोफेसर उन्होंने अनेक विद्यार्थियों को संगीत की विधाओं से परिचित करवाया। सुक्खू ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को इस अपूर्णीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। उन्होंने हिमाचली वाद्ययंत्रों को देश-प्रदेश में पहचान दिलाई।