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Himachal: राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित महान शास्त्रीय संगीतकार और लोक कलाकार का 92 वर्ष की आयु में निधन

Mon, 13 Jan 2025 03:41 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

महान शास्त्रीय संगीतकार, लोक कलाकार और प्रख्यात लेखक प्रोफेसर नंद लाल गर्ग का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। 
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प्रोफेसर नंद लाल गर्ग (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के सांस्कृतिक और संगीत जगत की एक प्रमुख शख्सियत, प्रोफेसर नंद लाल गर्ग, शिमला में 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह एक महान शास्त्रीय संगीतकार, लोक कलाकार और प्रख्यात लेखक थे। उनके निधन से राज्य और सांस्कृतिक समुदाय में शोक की लहर है। हिमाचली संगीत, कला और संस्कृति को बढ़ावा देने और उसे संरक्षित करने में उनका योगदान अतुलनीय था।

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प्रोफेसर गर्ग शिमला के प्रसिद्ध 'धामी घराना' के वंशज थे, जिसका प्रभाव उनकी संगीत साधना पर गहरे तौर पर पड़ा। उनके जीवन का उद्देश्य इस समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को न केवल संजोना था, बल्कि उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना भी था। उनका योगदान केवल शास्त्रीय संगीत तक सीमित नहीं था, बल्कि हिमाचल प्रदेश की लोक परंपराओं को भी संरक्षित करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

2023 में, प्रोफेसर गर्ग को संगीत नाटक अकादमी द्वारा राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उनके जीवन भर के सांस्कृतिक योगदान का प्रतीक था। उनके संगीत और कला के प्रति समर्पण ने उन्हें भारत के सांस्कृतिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलवाया। इसके अलावा, वह हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पहले संगीत प्रथम अन्वेषकों में रहे और उन्होंने यहां अनेक छात्रों को संगीत शिक्षा दी।
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प्रोफेसर गर्ग ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन शिमला के पायनियर कलाकार भी रहे, जहां उन्होंने क्षेत्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया। शिमला में उनकी उपस्थिति ने हिमाचली संगीत और कला को एक नया आयाम दिया।

इसके अलावा, प्रोफेसर गर्ग एक प्रसिद्ध लेखक भी थे, जिन्होंने हिमाचल प्रदेश की संगीत, वाद्य यंत्रों और कला संस्कृति पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं। उनकी पुस्तकें और डॉक्यूमेंटरी देशभर में सराही गईं, और भारत सरकार से उन्हें मान्यता प्राप्त हुई। उनके द्वारा निर्मित कई डॉक्यूमेंटरी में हिमाचल की सांस्कृतिक धरोहर को बेहद प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया, जो आज भी सहेजी जाती हैं।

प्रोफेसर गर्ग राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय के स्तर पर भी कई सांस्कृतिक समितियों और प्रख्यात संस्थानित सम्मेलनों जैसे कि यूनेस्को आदि के सदस्य रहे। उन्होंने सांस्कृतिक नीतियों और पहचानों को संरक्षित करने के लिए हमेशा अपनी राय दी। उनके योगदान केवल कला और संगीत तक सीमित नहीं थे, बल्कि वह हिमाचल की लोक परंपराओं के संरक्षक भी थे।



प्रोफेसर नंद लाल गर्ग का निधन हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। हालांकि उनका योगदान हमेशा जीवित रहेगा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
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सीएम ने जताया शोक
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रो. गर्ग का पूरा जीवन कला और संगीत की सेवा में समर्पित रहा। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में बतौर संगीत प्रोफेसर उन्होंने अनेक विद्यार्थियों को संगीत की विधाओं से परिचित करवाया। सुक्खू ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को इस अपूर्णीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। उन्होंने हिमाचली वाद्ययंत्रों को देश-प्रदेश में पहचान दिलाई।

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