मनोरंजन के साथ रोजगार भी
जलक्रीड़ा गतिविधियां शुरू होने से यहां लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है। यहां पर लगभग 200 से 250 लोग रोजगार से जुड़े हैं, जिनमें 35 को प्रत्यक्ष रोजगार झील में होने वाली जलक्रीड़ा गतिविधियों से मिला है और 200 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से व्यापारियों को भी लाभ मिल रहा है।
देश के प्रथम राष्ट्रपति भी आ चुके हैं तत्तापानी
तत्तापानी एक धार्मिक स्थल भी है। मान्यता है कि यहां महर्षि जम्दाग्नि ने वर्षों तक तपस्या की थी और यहां मौजूद गंधकयुक्त गर्म पानी प्राचीन काल से ही उपलब्ध है। तत्तापानी में गर्म जल स्त्रोत या कुड़ का उद्घाटन प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 22 सितम्बर, 1952 में किया था। वर्ष 1938 में नोबेल पुरस्कार विजेता कवि, साहित्यकार व दार्शनिक रविन्द्र नाथ टैगोर भी तत्तापानी का भ्रमण कर चुके हैं।
देशभर से पर्यटक पहुंच रहे तत्तापानी
झील में आयोजित होने वाली जलक्रीड़ा गतिविधियों का आनंद उठाने के लिए देशभर से पर्यटक तत्तापानी पंहुच रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के पर्यटक शामिल हैं। पहाड़ों की रानी शिमला की सैर पर आने वाले पर्यटक अब तत्तापानी का भी रूख कर रहे हैं। पूर्व में वे केवल कुफरी, नालदेहरा, मशोबरा, नारकंडा आदि तक ही सीमित रहते थे। तत्तापानी जलाशय में वाटर एक्टिविटी शुरू होने से अब वे एक दिन का अतिरिक्त स्टे यहां करने लगे हैं। जिसका सीधा लाभ शिमला व आसपास के होटलियर्स को भी मिल रहा है।
पर्यटन सीजन में प्रतिदिन पहुंच रहे 500 पर्यटक
स्थानीय कारोबारी एवं तत्तापानी वाटर स्पोर्ट्स एसोशिएसन के सचिव प्रेम रैना ने बताया कि झील में स्टिल वाटर एक्टिविटीज शुरू होने से क्षेत्र साहसिक व रोमांचक पर्यटन गंतव्य के रूप में उभरा है और इस स्थान को प्रदेश का मिनी गोवा कहा जाने लगा है। पर्यटन सीजन में लगभग 100 से अधिक गाड़ियां और प्रतिदिन 400 से 500 पर्यटक तत्तापानी पंहुच रहे हैं। आवाजाही बढ़ने से तत्तापानी सहित आसपास स्थित होटल व्यवसाय को लाभ मिल रहा है। राज्य सरकार को भी अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो रहा है। बकौल प्रेम रैना पिछले एक वर्ष में लगभग 50 से 60 हजार पर्यटक तत्तापानी पहुंच चुके हैं।