अब विधायक सड़कों व भवनों के निर्माण के लिए वन भूमि की क्षतिपूर्ति की एवज में एनपीवी और वनीकरण की क्षतिपूर्ति के लिए बजट का भुगतान खुद करेंगे। यानी छोटी परियोजनाओं का एनपीवी विधायक खुद जमा करेंगे। इससे सरकारी विभागों पर दबाव कुछ कम होगा। आमतौर पर यह भुगतान संबंधित महकमों को करना होता है।
विधायक क्षेत्र विकास निधि के तहत वन भूमि पर एफसीए और एफआरए मामलों की नेट प्रेजेंट वैल्यू (एनपीवी) और कंपेनसेटरी अफॉरेस्टेशन की राशि दी जा सकेगी। प्रदेश में सड़क और अन्य विकास योजनाओं के अधर में फंसने के चलते यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, इस निधि के तहत हर विधायक को एक वित्तीय वर्ष के लिए दो करोड़ रुपये मिलते हैं। ऐसे में बड़ी परियोजनाओं के लिए इस क्षतिपूर्ति धनराशि का भुगतान नहीं किया जा सकेगा।