नशे के प्रयोग को लेकर प्रदेश की पंचायतों को रेड, येलो और ग्रीन तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। ऐसी पंचायतें, जिनमें चिट्टे की अधिक तस्करी और प्रयोग हो रहा है, उन्हें रेड श्रेणी में रखा जाएगा। जिन पंचायतों में भांग की तस्करी और प्रयोग अधिक हो रहा है, उन्हें येलो श्रेणी में रखा जाएगा। नो ड्रग पंचायत को ग्रीन श्रेणी में रखा जाएगा। प्रदेश सरकार के निर्देशों पर हिमाचल पुलिस ने पंचायतों के नशाें के आधार पर वर्गीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एनडीपीएस एक्ट के तहत किस जिले में कितने मामले दर्ज हैं, इसका डाटा भी जुटाया जा रहा है। पंचायत स्तर पर नशों की तस्करी और प्रयोग करने वालों का डाटा जुटाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों, नायब तहसीलदार और नंबरदार से जानकारी हासिल की जा रही है। मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग को एंटी ड्रग स्ट्रेटजी के तहत आयोजित बैठक में नशों की तस्करी और उपयोग करने वालों का वास्तविक डाटा तैयार करने के निर्देश दिए थे ताकि नशा तस्करों से निपटने के लिए एनडीपीएस कमांडो फोर्स का गठन किया जा सके।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल भी प्रदेश में बढ़ती नशे की समस्या पर चिंता जता चुके हैं। प्रदेश में की जा रही ड्रग नेटवर्क मैपिंग के माध्यम से मिलने वालों आंकड़ों के आधार पर नशे में फंसे युवाओं को नशा मुक्ति केंद्रों तक पहुंचा कर समाज की मुख्य धारा में जोड़ने का भी प्रयास किया जाएगा।