ये है मान्यता
मान्यता है कि दंपती के राधाष्टमी के दिन पवित्र डल में डुबकी लगाने से वह पुण्य और सुख-स्मृद्धि के भागी बनते हैं। राधाष्टमी का शुभ मुहूर्त शुरू होते ही पवित्र डल झील का पानी एकदम बढ़ना शुरू हो जाता है। यात्रा पर गए श्रद्धालु पवित्र डल झील का जल प्रसाद के तौर पर अपने साथ लेकर घर लौटते हैं। मणिमहेश यात्रा के दौरान राधाष्टमी पर्व के दौरान हर प्रकार के अनुष्ठान, मुंडन, वैवाहिक आयोजन व अन्य कार्यों का फल शुभ रहता है। पड़ोसी राज्य जम्मू के किश्तवाड़, भद्रवाह और डोडा से दंपती अपने छह माह से लेकर 10 वर्ष तक के बच्चों को लेकर पवित्र मणिमहेश यात्रा पर पहुंचे।
छह लाख श्रद्धालुओं ने लगाई पवित्र डल झील में डुबकी
पवित्र मणिमहेश यात्रा में राधाष्टमी के बड़े शाही स्नान तक करीब छह लाख श्रद्धालु पवित्र डल में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। हालांकि, श्रद्धालुओं का सही आंकड़ा भरमौर प्रशासन के पास भी अभी तक उपलब्ध नहीं हैं। इसकी मुख्य वजह श्रद्धालुओं की ओर से ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण न करवाना मुख्य वजह है। भरमौर के प्रशासनिक अधिकारी के मुताबिक जन्माष्टमी तक ही पवित्र डल में करीब डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु डुबकी लगा चुके हैं। पीर पंजाल की पहाड़ियों के पूर्वी हिस्से में तहसील भरमौर में स्थित मणिमहेश तीर्थ स्थल में हर वर्ष जन्माष्टमी के उपलक्ष्य पर छोटा शाही स्नान और राधाष्टमी पर बड़ा शाही स्नान होता है। इसमें देश-विदेश समेत पड़ोसी राज्यों से सैकड़ों की संख्या में शिवभक्त पवित्र डल में डुबकी लगाने के लिए पहुंचते हैं। उधर, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी भरमौर कुलवीर सिंह राणा ने बताया कि राधाष्टमी न्हौण तक करीब छह लाख श्रद्धालु पवित्र डल में डुबकी लगा चुके हैं।