जानकारी के अनुसार खुंब अनुसंधान निदेशालय सोलन ने शिटाके 330 को भी लकड़ी के बुरादे पर तैयार किया है। देश भर में खुंब अनुसंधान केंद्र इस औषधीय मशरूम को तैयार करने में पहले स्थान पर है। इसका अधिकतर प्रयोग कॉफी और दवाओं में होता है। स्वाद में बेहद कड़वी होने से दवा में इसका प्रयोग कैप्सूल में किया जाता है। सूखी मशरूम के 5,000 रुपये प्रति किलो दाम मिलते हैं। मशरूम को सीधे दवा कंपनियों को सप्लाई किया जाता है। यह मशरूम कैंसर की दवा का मुख्य स्रोत है।
शिटाके रिच एंटी ऑक्सीडेंट का स्रोत होने के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है, जिससे कैंसर जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। डीएमआर की ओर से डीएमआर शिटाके 330 का स्पॉन तैयार करने के बाद इसे उगाने पर शोध चल रहा था। इसमें अब सफलता मिल गई है। यह मशरूम लकड़ी के बुरादे पर ही 16-18 डिग्री तापमान पर 45 दिनों में तैयार होगी।
वैज्ञानिकों ने शिटाके मशरूम की नई किस्म तैयार की है। इसको तैयार करने में डीएमआर भारत में पहले और दुनिया में पांचवें स्थान पर है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को नियंत्रित करने में यह मशरूम बहुत सहायक है -डॉ. वीपी शर्मा, निदेशक, खुंब अनुसंधान निदेशालय सोलन