माताएं बच्चों को गोद में उठाकर निकलीं। कोई नंगे पांव था तो किसी को घर की चिंता लगी थी। सभी लोग बाहर निकले तभी भारी प्रलय हुआ और देखते ही देखते सभी के घर, पशु और घर में रखा सारा सामान मिट्टी में मिल गया। आज स्याठी गांव के सभी लोग सुरक्षित हैं। गांववासियों को नैणा माता मंदिर लौंगणीधार में शरण दी गई है। उनके साथ कुत्ता भी रह रहा है। मौजूदा समय में स्याठी गांव में आई विपदा के बाद वहां मलबे का ढेर लगने से एक कृत्रिम झील बन गई है। इससे खतरा फिर से बढ़ गया है।
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स्याठी गांव में कृत्रिम झील की निकासी के लिए लोक निर्माण विभाग को निर्देश दे दिए हैं। जल्द जेसीबी मशीन लगाकर इसे दुरुस्त कर दिया जाएगा।-
जोगिंद्र पटियाल, एसडीएम धर्मपुर