उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश वर्तमान में जिस गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से बिना सोचे-समझे लिए जा रहे फैसले राज्य को और अधिक गहरे वित्तीय गर्त में धकेल रहे हैं। ठाकुर ने सरकार की ओर से लिए गए हालिया निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि संसाधनों की भारी कमी के कारण मुख्यमंत्री ने स्वयं अपना 50 प्रतिशत वेतन अगले छह महीनों के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है और साथ ही मुख्य सचिव औक पुलिस महानिदेशक के वेतन में भी 50 प्रतिशत, आईएएस अधिकारियों व मंत्रियों के वेतन में 30 प्रतिशत और विधायकों के वेतन में 20 प्रतिशत की कटौती या स्थगन की बात कही है।
उन्होंने इस स्थिति को स्पष्ट शब्दों में वित्तीय आपातकाल का संकेत करार देते हुए कहा कि यदि सरकार को अपने शीर्ष अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों का वेतन रोकना पड़ रहा है, तो यह प्रदेश की चरमराती अर्थव्यवस्था का प्रमाण है। सवाल उठाते हुए कहा कि अनाथ बच्चों और विधवाओं के नाम पर पेट्रोल-डीजल पर सेस (उपकर) लगाकर सरकार चलाने का प्रयास करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह सरकार की प्रशासनिक विफलता को भी दर्शाता है।
नेता विपक्ष ने कहा कि एक और फैसला कांग्रेस सरकार ने हिमाचल में लिया है कि राज्य में प्रवेश करने वाले वाहनों के एंट्री टैक्स में भारी बढ़ोतरी की गई है जो व्यावहारिक नहीं है। पंजाब सरकार ने भी इसका विरोध किया है और कहा है कि हम भी हिमाचल से आने वाले वाहनों पर एंट्री टैक्स लगाएंगे। अगर पंजाब ने ऐसा किया तो हिमाचल की जनता पर बहुत बोझ पड़ेगा और राज्य का प्रमुख व्यवसाय पर्यटन खत्म हो जाएगा। जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल में इस तरह के अजीब और अव्यावहारिक फैसले लिए जाना गंभीर चिंता का विषय है।