इसके बाद महिला की मृत्यु का प्रमाणपत्र बनाने के लिए एक परिजन के हस्ताक्षर की अर्जी नगर निगम में आई। आवेदन और फॉर्म-2 के मुताबिक नगर निगम ने मृत्यु प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया। मामला पांच जनवरी का है। इसके बाद महिला ने नगर निगम में इसे रद्द करने के लिए आवेदन किया है और कार्रवाई की मांग की है। वहीं, महिला के बच्चों ने भी नगर निगम से कई सवाल-जवाब किए। सवाल यह है कि अंतिम संस्कार किसका हुआ है। इस मामले में भी अब नगर निगम ने जांच शुरू कर दी है। नगर निगम ने श्मशानघाट में तैनात कर्मी को तलब किया है। कर्मी से कई प्रकार की पूछताछ बीते दिनों हुई है। कर्मी ने साफ किया है कि उसने कागजात लेने और फॉर्म भरने के बाद लकड़ियां दी है।
महिला के मृत्यु प्रमाणपत्र की नगर निगम से पांच प्रतियां ली गई हैं। जिसने ये प्रतियां ली हैं, उसके भी बाकायदा साइन हुए हैं। दूसरी ओर फॉर्म संख्या-2 पर प्रत्यक्षदर्शियों के नंबर पर भी संपर्क कर जानकारी ली है। जबकि एक अन्य का नंबर नहीं मिल रहा है। थाना प्रभारी हंसराज रुंगटा ने कहा कि नगर निगम से शिकायत आई है। मामले में जांच चल रही है।
मैं तो जिंदा हूं: इंश्योरेंस कंपनी का कर्मी घर आया और महिला से पॉलिसी संबंधित कागजात मांगने लगा। महिला ने पूछा कि वह कागजात क्यों मांग रहा है। इस पर कर्मी ने बताया कि पॉलिसी करवाने वाली महिला की मौत हो चुकी है तो महिला ने कहा कि मैं तो जिंदा हूं।
मामला सामने आने के बाद पुलिस में शिकायत दी गई है। जांच करने के लिए कहा है। महिला ने अपना आधार कार्ड तक दिखाया है। महिला ने इस बारे में निगम को शिकायत दी है- बिमला वर्मा, सहायक आयुक्त, नगर निगम, सोलन।