कांग्रेस विधायक भी मुख्यमंत्री को बुलाने से डरते हैं
जयराम ने दावा किया कि संस्थान बंद करने का अभियान अभी थमा नहीं है। इसका असर सत्तारूढ़ कांग्रेस के विधायकों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विधायक मुख्यमंत्री को अपने क्षेत्रों में बुलाने से भी बच रहे हैं, क्योंकि उन्हें आशंका रहती है कि इलाके में पूर्व सरकार का कोई संस्थान मिला तो उसे भी डिनोटिफाई किया जा सकता है। सरकार के करीब चार साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री के पास जनता के बीच बताने के लिए अपनी कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। इसी वजह से वह भाजपा सरकार की लोकप्रिय योजनाओं को बदनाम करने और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर रहे हैं।
जयराम बोले- रोते-रोते आए, रोते ही जाएंगे
नियम 130 के तहत युवाओं को रोजगार के तहत चल रही चर्चा में बेहतर सुझाव को लेकर संसदीय कार्य मंत्री ने विधायक प्रकाश राणा की प्रशंसा की। साथ ही कहा कि केंद्र सरकार ने हिमाचल की आरडीजी (राजस्व घाटा अनुदान) बंद कर दी। आरडीजी आय और व्यय के अंतर को पूरा करती थी। पीएम मोदी ने 1,500 करोड़ की घोषणा की थी, वह भी नहीं मिला। इस पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ने पलटवार करते हुए कहा कि हर बार केंद्र को कोसना गलत है। केंद्र में जब मनमोहन की सरकार थी, तब दो वित्तीय वर्षों में 18 हजार करोड़ मिला था। मोदी सरकार ने अपने दो कार्यकाल में हिमाचल को 89,300 करोड़ दिया है। केंद्र को कोसने के बजाय ये बताएं कि सरकार को आगे क्या करना है। हिमाचल की नहीं, 17 राज्यों की आरडीजी बंद हुई है। इसमें भाजपा के राज्य ज्यादा है। आप रोते-रोते आए थे, रोते ही जाएंगे।