हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुवादक (ट्रांसलेटर) पद पर नियुक्ति संबंधी याचिका को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा है कि नियुक्ति के लिए पात्रता मानदंड सर्वाेपरि हैं। प्रार्थी अनुवादक के पद के लिए 5 साल की आवश्यक सेवा अवधि की पात्रता पूरी नहीं करता है। हाईकोर्ट ने याची की मांग को खारिज कर दिया, इसमें उसने अंतिम परिणाम को रद्द करने और अपनी उम्मीदवारी को योग्य घोषित करने की मांग की थी। खंडपीठ ने कहा कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ऑफिसर्स एंड मेंबर्स ऑफ स्टाफ (भर्ती, पदोन्नति, सेवा शर्तें, आचरण और अपील) नियम 2015 के अनुसार, अनुवादक पद के लिए फीडर कैडर में 5 साल की सेवा आवश्यक है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता को 2 जून 2018 को कुल्लू से हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया था। इस स्थानांतरण के समय स्पष्ट शर्तें थीं कि याचिकाकर्ता कुल्लू में अपनी पिछली सेवा की वरिष्ठता को त्याग देगा और भविष्य में किसी भी वरिष्ठता के दावे का हकदार नहीं होगा। कोर्ट ने माना कि कट-ऑफ तिथि 20 सितंबर 2022 तक याचिकाकर्ता के पास हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में आवश्यक पांच साल की सेवा नहीं थी। प्रार्थी का तर्क था कि सिविल और सत्र प्रभाग कुल्लू में क्लर्क के रूप में 30 दिसंबर 2016 से 1 जून 2018 तक दी गई सेवा को भी अनुवादक के पद की पात्रता के लिए गिना जाना चाहिए। अनुवादक पद के लिए नियमों में रजिस्ट्री के पात्र क्लास थ्री और क्लास फोर कर्मचारियों के लिए पांच साल की सेवा अवधि अनिवार्य है।