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हिमाचल हाईकोर्ट: जांच अधिकारियों के ढुलमुल रवैये से पीड़ित को न्याय से वंचित नहीं कर सकते

Wed, 16 Sep 2026 04:30 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस जांच में रहने वाली गंभीर खामियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पूरे प्रदेश के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी करने का आदेश दिया है। 
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस जांच में रहने वाली गंभीर खामियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पूरे प्रदेश के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी करने का आदेश दिया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश भूपेश शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जांच अधिकारियों की अज्ञानता, ढुलमुल रवैये या लापरवाही के कारण किसी भी पीड़ित को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने डीजीपी को आदेश दिया है कि यह अनिवार्य सर्कुलर और दिशा-निर्देश आगामी 15 अक्तूबर 2026 से पहले राज्य के सभी थानों, पुलिस अधीक्षकों और जांच प्रभारियों को जारी हो जाने चाहिए। खंडपीठ ने डीजीपी को राज्य की पूरी पुलिस प्रणाली में सुधार के लिए कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया है।

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 खंडपीठ ने राज्य के सभी जांच अधिकारियों को लिखित रूप से जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 की धारा 94 के प्रावधानों के बारे में पूरी तरह जागरूक और प्रशिक्षित किया जाए। नाबालिग पीड़ितों या कानून से संघर्षरत किशोरों से जुड़े मामलों में, जांच के बिल्कुल शुरुआती चरण में ही सबसे पहले मैट्रिक सर्टिफिकेट या आधिकारिक स्कूल रिकॉर्ड जुटाना अनिवार्य किया जाए, क्योंकि कानूनन यह सबसे विश्वसनीय साक्ष्य है। अदालत ने यह आदेश बिलासपुर जिले के कोट-कहकूर पुलिस स्टेशन में दर्ज पॉक्सो और दुष्कर्म के एक मामले की सुनवाई के पश्चात जारी किए गए।
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ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की थी। अपील की समीक्षा के दौरान सामने आया कि जांच अधिकारी ने पीड़िता की उम्र (नाबालिग होने का दावा) साबित करने के लिए सबसे प्राथमिक और कानूनी रूप से मजबूत सबूत, उसका मैट्रिकुलेशन (स्कूल) सर्टिफिकेट रिकॉर्ड पर लिया ही नहीं था। पुलिस ने केवल पंचायत के जन्म प्रमाण पत्र के भरोसे केस छोड़ दिया था, जिससे तकनीकी आधार पर पूरा मामला कमजोर होने और आरोपी के बरी होने का खतरा पैदा हो गया था। हाई कोर्ट ने इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
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