हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के समय में बनाए गए लीज रूल्स रद्द कर दिया है। सितंबर 2011 में बने इन लीज रूल्स को तत्कालीन धूमल कैबिनेट द्वारा स्वीकृति न किए जाने के आधार पर रद्द किया गया।
2011 के लीज रूल्स रद्द हो जाने के बाद अब हिमाचल प्रदेश में 1993 के लीज रूल्स ही लागू होंगे। इसके अलावा वीरभद्र सरकार ने अब नए लीज रूल्स बनाने का फैसला किया है।
विधि विभाग के मुताबिक भाजपा सरकार के समय में बनाए गए लीज रूल्स को उस समय कैबिनेट के सामने स्वीकृति के लिए रखा जाना चाहिए था। कैबिनेट ने इसकी स्वीकृति पर मुहर नहीं लगाई, इसलिए इन्हें लीज रूल्स के तौर पर मान्यता प्रदान नहीं की जा सकती।
दरअसल सितंबर, 2011 में इन लीज रूल्स को तत्कालीन प्रधान सचिव राजस्व ने अपने स्तर पर ही लागू कर दिया था। माना जा रहा है कि सरकार के लीज रूल्स को रद्द करने के फैसले से तत्कालीन राजस्व सचिव दीपक सानन की मुश्किलें बढ़ सकती है।
2011 में बनाए गए लीज रूल्स में कुछ अहम बदलाव किए गए थे। मसलन पनबिजली प्रोजेक्ट के लिए लीज पर दी जाने वाली जमीन की लीज मनी को 18 प्रतिशत से घटाकर साढ़े तीन प्रतिशत कर दिया गया था।
अब सबकी नजर उन लोगों पर है जिन लोगों को 2011 के लीज रूल्स के तहत जमीनें लीज पर दी गई हैं। ऐसे भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनके खिलाफ भी कोई कार्रवाई की जाएगी।
सिंगल विंडो में 15 उद्योगों को मंजूरी
इधर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई सिंगल विंडो की बैठक में हिमाचल में 1000 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के बाद हुई बैठक में 15 प्रोजेक्ट मंजूर किए गए। इनमें 7 नए उद्योग हैं, जबकि 8 पुराने उद्योगों का विस्तार होगा।