तन पर कपड़े बचे... आंख में आंसू
अग्निकांड ने प्रभावित परिवारों के सिर से छत छीन ली है। उनके पास तन पर पहने कपड़ों और आंखों में आंसुओं के सिवा कुछ नहीं बचा है। आग का गोला बन चुके मकानों से लोग कुछ भी नहीं निकाल पाए। जिन मकानों में पहले आग लगी, उनसे मवेशियों को ही निकाला जा सका है। मकान के अंदर का सारा सामान, कपड़े राख में बदल गए हैं। गांव में आग की इस घटना के बाद पूरी तरह से शोक पसर गया है।
इन लोगों के जले मकान : दलीप सिंह पुत्र हिमत राम, यज्ञ चंद पुत्र हिमत राम, दुनीचंद पुत्र लोभू राम, लोत राम पुत्र रोशन लाल, लुदरमणी पुत्र लोगू, रविंद्र पुत्र उगत राम, माडू राम पुत्र मोती राम, कातकू पुत्र मोती राम, किशोर कुमार पुत्र दिले राम, अनूप राम पुत्र दुला राम, वितन सिंह पुत्र देवी राम, रमेश कुमार पुत्र खूबराम, गेहरू राम पुत्र केवल राम,लोत राम पुत्र लुदर चंद, महिंद्र सिंह पुत्र मोती राम, चेन सिंह पुत्र देवी राम और डोलू देवी पत्नी प्रीमू राम शामिल हैं।
इनकी गोशालाएं चढ़ीं भेंट : दलीप सिंह पुत्र हिमत राम, यज्ञ चंद पुत्र हिमत राम, दुनी चंद्र पुत्र लोस राम, लुदरमणी पुत्र लोभू राम, रविंद्र पुत्र उगम राम तथा डोलू देवी पुत्र प्रीमू राम की गोशालाएं जल गई हैं।