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हिमाचल पंचायत चुनाव: मिड-डे मील व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनाएंगी पोलिंग पार्टियों के लिए खाना

Tue, 19 May 2026 10:06 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 पंचायत चुनाव में मतदान ड्यूटी में दौरान कर्मचारियों को भोजन की व्यवस्था मिड-डे मील, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हवाले रहेगी। इसे लेकर उचित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
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पंचायत चुनाव 2026। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश पंचायत चुनाव में मतदान ड्यूटी में दौरान कर्मचारियों को भोजन की व्यवस्था मिड-डे मील, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हवाले रहेगी। इसे लेकर उचित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने उच्च शिक्षा, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा तथा विकास परियोजना बाल अधिकारियों को कर्मचारियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने को कहा है। हिमाचल में तीन चरणों में पंचायत चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को लंबे समय तक काम करना पड़ता है। ऐसे में सभी मतदान कर्मियों के लिए समय पर भोजन उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों को सौंपी गई है। मिड-डे मील और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से पोलिंग पार्टियों के लिए भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। 

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महिला आयोग की चेयरमैन को आयोग की हिदायत

चुनावी प्रक्रिया के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी को चुनाव आचार संहिता का पालन सुनिश्चित करने को लेकर हिदायत दी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि वह किसी उम्मीदवार या राजनीतिक दल के पक्ष में चुनाव प्रचार करती हैं तो इसमें किसी भी प्रकार की सरकारी मशीनरी, सरकारी वाहन, कार्यालय अथवा सरकारी संसाधनों का उपयोग नहीं होना चाहिए। भाजपा की ओर से आयोग के पास इस संबंध में शिकायतें पहुंची थीं। इनमें कहा गया था कि चुनावी गतिविधियों के दौरान सरकारी मशीनरियों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। शिकायतों के आधार पर आयोग ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
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आयोग ने कहा है कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के दौरान सभी सांविधानिक और सरकारी पदों पर बैठे लोगों को निष्पक्षता बनाए रखनी होगी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी पदाधिकारी को अपने सरकारी पद का लाभ चुनाव प्रचार के लिए लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसी बीच आयोग के पास सरकारी जमीनों पर कथित कब्जों से जुड़ी शिकायतें भी पहुंची हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ स्थानों पर सरकारी भूमि का उपयोग चुनावी और निजी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। इन शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए आयोग ने संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों को जांच-पड़ताल करने और तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। 
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